खाद की कालाबाजारी पर सख्ती: गड़बड़ी मिली तो सीधे जेल, सरकार बोली- किसानों को नहीं होगी कोई कमी

रायपुर, 08 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों पर अब कड़ी कार्रवाई तय है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने साफ चेतावनी दी है कि खाद की जमाखोरी या अधिक कीमत पर बिक्री करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, बल्कि सीधे जेल भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते संभावित कमी को देखते हुए सरकार पूरी तरह सतर्क है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। राज्य में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, साथ ही किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरकों की आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अधिकारियों को नियमित व आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में 5 मई से 20 मई तक चलने वाले “विकसित भारत संकल्प अभियान” की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगे और उन्हें आधुनिक खेती, वैकल्पिक उर्वरक और नई तकनीकों की जानकारी देंगे।
सरकार ने इस बार डीएपी की जगह एनपीके, एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। साथ ही खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए दलहन, तिलहन और मक्का फसल को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे किसानों की आय बढ़े और लागत घटे।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एग्रीस्टैक पोर्टल पर फार्मर आईडी पंजीयन एक सप्ताह में पूरा किया जाए, ताकि कोई भी किसान पीएम किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे।
बैठक में पीएम आशा योजना की समीक्षा के दौरान पाया गया कि धमतरी को छोड़ अन्य जिलों में प्रगति धीमी है। इस पर मार्कफेड, नाफेड और समितियों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा मखाना और सिंघाड़ा की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना बनाने को कहा गया, साथ ही मछली पालन के साथ एकीकृत खेती अपनाने पर भी जोर दिया गया।
सरकार का स्पष्ट फोकस है कि किसानों को सिर्फ खाद उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी खेती की ओर आगे बढ़ाना है।



