वनवासियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान: चरणपादुका योजना की फिर शुरुआत, छत्तीसगढ़ में 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को मिली बड़ी सौगात

रायपुर, 20 जनवरी 2026/छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए सरकार की योजनाएं अब जीवन स्तर बदलने का माध्यम बन रही हैं। संग्रहण लाभ का 80% हिस्सा, बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, दुर्घटना बीमा, और वनोपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी सुविधाओं से लाखों परिवारों को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा मिल रही है।
प्रदेश में तेंदूपत्ता का ₹5,500 प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक और राजमोहिनी देवी योजना के तहत अतिरिक्त लाभ दिए जा रहे हैं, जिससे वनांचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
चरणपादुका योजना की वापसी: वनवासियों को बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ सरकार ने चरणपादुका योजना को पुनः शुरू कर वनवासियों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई यह योजना अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में फिर लागू की गई है। यह फैसला गरीब-हितैषी और संवेदनशील शासन की स्पष्ट मिसाल माना जा रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग ने योजना को तेज गति और पूरी पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारा है।
12.40 लाख परिवारों को मिला सीधा लाभ
वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखियाओं को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं वितरित की गईं। इसके लिए ₹40 करोड़ खर्च किए गए।
कठिन जंगल परिस्थितियों में काम करने वाली महिलाओं को इससे सुरक्षा और सुविधा दोनों मिली हैं।
2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी चरणपादुका देने का निर्णय लिया है। इसके लिए ₹50 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
यह फैसला संग्राहक परिवारों के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी लाभ वाला माना जा रहा है।
जेम पोर्टल से खरीदी, एक साल की वारंटी
चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रही। वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता की हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी जा रही है।
वनांचल में बढ़ा सम्मान और आत्मविश्वास
इस निर्णय से वनांचल क्षेत्रों में उत्साह और भरोसे का माहौल बना है। चरणपादुका योजना उन मेहनतकश संग्राहकों तक राहत पहुंचा रही है, जो कठिन हालात में जंगलों से आजीविका कमाते हैं।
यह योजना केवल सुविधा नहीं, बल्कि वनवासियों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास देने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है।



