जशपुर में कथित जघन्य हत्या का सनसनीखेज खुलासा: दो महीने बाद ‘मृत’ युवक जिंदा लौटा, पुलिस जांच पर उठे गंभीर सवाल

रमेश शर्मा
जशपुर, 22 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक चौंकाने वाला और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सीटोंगा गांव का एक युवक, जिसे दो महीने पहले जघन्य हत्या का शिकार मान लिया गया था, अचानक सकुशल जिंदा वापस लौट आया। इस घटना ने न सिर्फ मृतक के परिजनों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, सीटोंगा गांव निवासी सिमित खाखा के लापता होने के बाद एक जली हुई लाश बरामद की गई थी, जिसे परिजनों ने सिमित खाखा के रूप में पहचान लिया। पुलिस ने भी इस पहचान को शत-प्रतिशत सही मानते हुए हत्या का मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी।
हत्या जैसे गंभीर अपराध की जांच में जुटी पुलिस टीम ने बिना डीएनए परीक्षण कराए ही मामले को सुलझा हुआ मान लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने आनन-फानन में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा था कि आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार करते हुए पूरी वारदात की पटकथा बताई, घटनास्थल की निशानदेही की और सभी तथ्यों की पुष्टि की। इसके बाद चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ उस वक्त आया, जब करीब दो महीने बाद कथित मृतक सिमित खाखा स्वयं सही-सलामत अपने गांव लौट आया। यह दृश्य किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। सिमित को जीवित देखकर उसकी पत्नी, भाई और अन्य परिजन सबसे ज्यादा हैरान रह गए, क्योंकि उन्हीं लोगों ने जली हुई लाश की पुख्ता पहचान की थी।
इस घटनाक्रम ने पुलिस जांच की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। जहां परिजनों द्वारा जले हुए शव की पहचान में गलती होना समझा जा सकता है, वहीं पुलिस द्वारा बिना डीएनए टेस्ट के हत्या का मामला सुलझा लेना और चार लोगों को जेल भेज देना कई सवाल खड़े करता है।
इस पूरे प्रकरण पर पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह का कहना है कि पुलिस ने विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की है। आरोपियों के निष्पक्ष मजिस्ट्रेट बयान कराए गए और उसी आधार पर उन्हें जेल भेजा गया। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर चूक नहीं हुई है।
नार्को टेस्ट की भी ली जा सकती है मदद
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि अब इस मामले में जेल में बंद चारों आरोपियों को रिमांड पर लेकर दोबारा जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ, तो नार्को टेस्ट की मदद भी ली जा सकती है। इसके साथ ही पड़ोसी राज्य झारखंड और ओडिशा की पुलिस से संपर्क कर वहां दर्ज गुमशुदगी के मामलों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का दावा है कि इस बेहद पेचीदा और असाधारण मामले की सच्चाई जल्द ही सामने लाई जाएगी। फिलहाल यह मामला न सिर्फ जशपुर जिले, बल्कि पूरे प्रदेश और देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।



