
रायपुर, 23 जनवरी 2026/रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन लाला जगदलपुरी मण्डप में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम के प्रथम सत्र में “समकालीन महिला लेखन” विषय पर गहन और सार्थक परिचर्चा हुई। सत्र में इंदिरा दांगी, श्रद्धा थवाईत, जया जादवानी और सोनाली मिश्र ने सहभागिता करते हुए महिला लेखन की बदलती भूमिका और उसकी सामाजिक प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि आज का समकालीन महिला लेखन केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के यथार्थ, संघर्ष, असमानताओं और संवेदनाओं को मजबूती से सामने ला रहा है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक स्त्री लेखन आत्मकथात्मक होने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन का आईना बन चुका है, जो पाठकों को सोचने और प्रश्न करने के लिए प्रेरित करता है।
परिचर्चा के दौरान महिला सशक्तिकरण, समानता, सामाजिक न्याय और बदलते पारिवारिक व सामाजिक ढांचे जैसे अहम विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ।
वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिला लेखन ने साहित्य को नई भाषा, नए अनुभव और नए सरोकार दिए हैं, जिससे साहित्य अधिक समावेशी और यथार्थपरक बन सका है।
वक्ताओं का कहना था कि समकालीन महिला लेखन समाज में सकारात्मक बदलाव का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
यह न केवल स्त्री अनुभवों को स्वर देता है, बल्कि सामाजिक चेतना को जागृत करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। साथ ही महिला लेखन भारतीय साहित्य को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई दिशा प्रदान कर रहा है।



