
रायपुर, 27 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार को मुस्लिम समाज का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। 23 दिसंबर की रात शहर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में शहर सीरतुन्नबी कमेटी के आह्वान पर सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध भले शांतिपूर्ण था, लेकिन नाराज़गी तीखी थी।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि 23 दिसंबर की सुबह करीब 4 बजे पुलिस ने बिना नोटिस, बिना वारंट और बिना कारण बताए बुज़ुर्गों, महिलाओं और समाज के सम्मानित लोगों को उनके घरों से उठा लिया। कई लोगों को कड़ाके की ठंड में पुलिस वाहनों में बैठाकर थानों तक ले जाया गया।
“पूछताछ करनी थी तो नोटिस क्यों नहीं दिया?”
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि करीब 150 से अधिक लोगों को पुलिस थानों में ले जाकर सिर्फ दस्तावेज़ों की जांच के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन जिस तरीके से उन्हें उठाया गया, उससे समाज में डर और अपमान की भावना फैल गई।
लोगों का सवाल था—
अगर सिर्फ पूछताछ ही करनी थी तो सम्मन, नोटिस या कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
“आज वर्दी डर का प्रतीक बनती जा रही है” — मोहम्मद सोहेल सेठी
धरना को संबोधित करते हुए शहर सीरतुन्नबी कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल सेठी ने कहा—
“हम कानून के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से महिलाओं और बुज़ुर्गों को रात में उठाया गया, वह लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है।
आज वर्दी सुरक्षा की नहीं, बल्कि डर और तानाशाही की पहचान बनती जा रही है।”
उन्होंने महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और अदालतों की गाइडलाइंस की अनदेखी का भी आरोप लगाया।
कानून की धज्जियां उड़ने का आरोप
वरिष्ठ अधिवक्ता फैसल रिज़वी ने कहा—
“CrPC और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार महिलाओं और बुज़ुर्गों को रात में हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
इस मामले में प्रथम दृष्टया संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।”
“कार्रवाई एकतरफा और लक्षित”
धरना स्थल से यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस की यह कार्रवाई एक खास समाज को निशाना बनाकर की गई, जिससे मुस्लिम समाज में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि समाज पूछताछ से नहीं, बल्कि पूछताछ के अपमानजनक और डराने वाले तरीके से आहत है।
सिर्फ मुस्लिम समाज नहीं, कई समुदायों का समर्थन
इस आंदोलन में मुस्लिम समाज के साथ-साथ सतनामी, सिख, बौद्ध, उत्कल, मसीह, बोहरा, सिया और ईरानी समाज के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और संविधान व लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
हज़ारों लोगों की मौजूदगी, एक स्वर में न्याय की मांग
धरने में हजारों नागरिक शामिल हुए।
अंत में सभी वक्ताओं ने साफ कहा—
“मुस्लिम समाज संविधान के साथ खड़ा है, लेकिन सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा।”



