कभी हाथों में बंदूक, अब हुनर से रोजगार: आत्मसमर्पित नक्सलियों की बदलती जिंदगी की कहानी

रायपुर, 9 अप्रैल 2026/ जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा का मार्ग अपनाया था, अब वहीं हाथ अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल के पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा काष्ठ कला से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का लोगो, ग्राम पंचायत बोर्ड, बच्चों के लिए की-रिंग सहित अन्य सजावटी सामग्री तैयार की जा रही है। साथ ही कपड़े का थैला और कार्यालयों के लिए बस्ता भी बनाया जा रहा है।
सरकार द्वारा घोषित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन कांकेर द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को कुशल और दक्ष बनाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। यहां उन्हें काष्ठशिल्प, इलेक्ट्रिशियन, ड्राइविंग, सिलाई, राजमिस्त्री जैसे पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कभी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियां अब विभिन्न व्यवसायों में दक्ष हो रहे हैं, ताकि वे मुख्यधारा में शामिल होकर आजीविका से जुड़कर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
चौगेल कैंप बना कौशल प्रशिक्षण केंद्र
वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। शासन द्वारा नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
हिंसा का मार्ग छोड़कर लौटे नक्सलियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। पुनर्वास नीति-2025 के तहत भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैम्प में विभिन्न रोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कभी BSF कैम्प रहा यह स्थान अब हुनर का केंद्र बन चुका है। यहां 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग, राजमिस्त्री जैसे प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।
साथ ही उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—पुस्तकें, पाठ्य सामग्री, पेन-पेंसिल उपलब्ध कराए गए हैं और पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक भी नियुक्त हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके अलावा कैम्प में मनोरंजन गतिविधियां जैसे कैरम, वाद्य यंत्र, और अन्य खेल भी आयोजित होते हैं।
चौगेल पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, वाहन चालक के साथ घुड़सवारी प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। वर्तमान में सिलाई मशीन, काष्ठ शिल्प और असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण जारी है।
स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी, पशुधन विकास विभाग और ‘बिहान’ के माध्यम से कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है।
प्रशिक्षण उपरांत नियोजन करने वाला पहला जिला बना कांकेर
कांकेर जिला अब प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला पहला जिला बन गया है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने तीन नक्सल पीड़ितों और एक आत्मसमर्पित नक्सली को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा।
इनमें सगनूराम आंचला, रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। सभी को निजी फर्म में नियुक्ति मिली, जहां उन्हें 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन और अन्य वित्तीय सुविधाएं मिलेंगी।
इन सभी ने चौगेल कैम्प में असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
निजी क्षेत्र में नौकरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए बीरसिंह मंडावी ने कहा कि चौगेल कैम्प में उन्हें नया जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार भी प्रदान किया गया।



