
रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने निर्देश दिया है कि प्रदेश के हर पुलिस थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी और बच्चों के आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए।
आयोग ने 3 मार्च 2026 को जारी अनुशंसा आर-188 के तहत रायपुर पुलिस कमिश्नर और सभी जिलों के एसएसपी-एसपी को यह व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के संज्ञान में आया था कि कई थानों में नामित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की जानकारी स्वयं पुलिस कर्मियों और कभी-कभी थाना प्रभारी तक को नहीं होती। कई मामलों में स्थानांतरण के बाद लंबे समय तक यह जानकारी अपडेट नहीं रहती, जिससे बच्चों से जुड़े मामलों में बाल-सुलभ प्रोटोकॉल का सही पालन नहीं हो पाता।
आयोग ने बताया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 107 के अनुसार हर थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी और विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन करना अनिवार्य है। वहीं धारा 108 के तहत इस कानून के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना भी कानूनी जिम्मेदारी है, जबकि धारा 109 में इसके पालन की निगरानी की जिम्मेदारी बाल अधिकार संरक्षण आयोग को दी गई है।
अनुशंसा में यह भी कहा गया है कि हर थाने में प्रमुख दीवार सहित तीन स्थानों पर एक आयताकार डिस्प्ले बोर्ड बनाया जाए। बोर्ड की बॉर्डर स्लेट की तरह बनाई जाएगी ताकि बच्चों के लिए अनुकूल दिखाई दे। इसमें जिले की विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी, थाने के बाल कल्याण अधिकारी का पदनाम और हेल्पलाइन नंबर 1098 सफेद पक्के रंग से लिखा जाएगा, जबकि संबंधित अधिकारियों के नाम चॉक से लिखे जाएंगे ताकि स्थानांतरण होने पर तुरंत बदले जा सकें।
आयोग ने सभी जिलों को 31 मार्च 2026 से पहले यह व्यवस्था लागू करने और डिस्प्ले बोर्ड की तस्वीरों के साथ पालन प्रतिवेदन आयोग को भेजने के निर्देश दिए हैं।



