
नई दिल्ली। सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और विष्णु की पूजा के साथ-साथ पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर मौन साधना और दान-पुण्य करने से मानसिक शांति और आत्मशुद्धि प्राप्त होती है।
पंचांग और तिथियां:
- माघ माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी शाम 08:17 बजे से शुरू होकर 16 जनवरी रात 10:21 बजे तक रहेगी। इस दिन प्रदोष व्रत और शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।
- मासिक शिवरात्रि 16 जनवरी को मनाई जाएगी।
- चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी रात 10:21 बजे से शुरू होकर 18 जनवरी रात 12:03 बजे तक रहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौनी अमावस्या को 17 जनवरी को रिक्ता तिथि है, लेकिन उदया तिथि के अनुसार इसे 18 जनवरी 2026 को मानना श्रेष्ठकर होगा। इस दिन हर्षण योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग बन रहे हैं, जो पितरों की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति का विशेष अवसर प्रदान करते हैं।
धार्मिक महत्व:
- गंगा स्नान कर भगवान शिव और विष्णु की भक्ति।
- पितरों का तर्पण और श्राद्ध, जिससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं।
- मौन साधना और गुप्त दान से आत्मशुद्धि और मानसिक शांति।
ज्योतिषियों का कहना है कि मौनी अमावस्या पर किए गए धार्मिक अनुष्ठान जीवन में सुख, समृद्धि और पितृ कृपा लाते हैं।



