23 जनवरी से नवा रायपुर में साहित्य का महाकुंभ: 100 से ज्यादा दिग्गज साहित्यकार जुटेंगे, रायपुर साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

रायपुर, 21 जनवरी 2026।
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में देशभर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लेखक, विचारक और सांस्कृतिक मनीषी एक मंच पर नजर आएंगे।
रायपुर साहित्य उत्सव को छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
रजत जयंती वर्ष में साहित्य को समर्पित बड़ा आयोजन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है, और रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के साहित्यकारों को संवाद और विचार-विमर्श का साझा मंच प्रदान करेगा।
साहित्य से जुड़ेगा समाज, नई पीढ़ी को मिलेगी दिशा
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह आयोजन साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की संस्कृति को मजबूत करेगा और नई पीढ़ी को विचारशील बनाएगा।
साहित्य उत्सव के दौरान खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विमर्श और रचनात्मक चर्चाएं होंगी, जिससे समाज में संवाद की संस्कृति को बल मिलेगा।
‘आदि से अनादि’ तक साहित्य की यात्रा का प्रतीक
साहित्य उत्सव के लोगो में अंकित “आदि से अनादि” वाक्य साहित्य की उस अविराम यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर आधुनिक साहित्य तक की निरंतर धारा समाहित है।
तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा।
11 सत्रों में होगा गहन साहित्यिक मंथन
रायपुर साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें—
- 5 समानांतर सत्र
- 4 सामूहिक सत्र
- 3 संवाद सत्र
शामिल होंगे।
साहित्यकारों और प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता होगी।
पुस्तक मेला, नाटक और लोक संस्कृति का रंग
उत्सव के दौरान लगभग 40 स्टॉल वाला पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाएगा, जहां देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी।
विशेष आकर्षण के रूप में चाणक्य नाटक का मंचन, कवि सम्मेलन, लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जो दर्शकों को राज्य की समृद्ध लोक परंपरा से रूबरू कराएंगी।
राष्ट्रीय संवाद से जुड़ेगी छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा
रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़ों, जनजातीय परंपराओं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि का संगम प्रस्तुत करेगा।
यह आयोजन नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की पंक्तियां इस उत्सव की आत्मा को स्वर देती हैं—
“हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था,
मैं व्यक्ति को नहीं,
हताशा को जानता था…”*
यही साहित्य मनुष्य को साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।



