बिजली नहीं तो आंदोलन: गरियाबंद की 8 पंचायतों के ग्रामीणों ने NH-130C रोका, प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी

गरियाबंद (छत्तीसगढ़)।गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड स्थित राजापड़ाव क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। रविवार को 8 ग्राम पंचायतों के करीब 2 हजार से अधिक ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे 130C पर चक्काजाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
इस प्रदर्शन में लगभग 30 गांवों से आए महिला और पुरुष शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव पिछले कई दशकों से अंधेरे में हैं और बार-बार मांग के बावजूद सरकार अब तक उन्हें बिजली उपलब्ध नहीं करा पाई है। बिजली को लेकर यह चौथी बार है जब ग्रामीणों को नेशनल हाईवे जाम करना पड़ा है।
20 से अधिक गांव आज भी बिजली से वंचित
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बताया कि राजापड़ाव क्षेत्र की 8 पंचायतों में से केवल अड़गड़ी, शोभा और गोना पंचायत में आंशिक रूप से बिजली पहुंच पाई है, जबकि भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव जैसे गांव आज भी पूरी तरह अंधेरे में हैं। इस इलाके के 20 से ज्यादा गांव उदंती-सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में स्थित हैं, जिसके कारण वर्षों से बिजली का काम अधर में लटका हुआ है।
मंजूरी के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि इन गांवों में अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाने की प्रशासनिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन बजट की कमी बताकर अब तक काम शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद सरकार ने जमीन पर कोई काम नहीं किया।
पेसा कानून और संवैधानिक अधिकारों का हवाला
अम्बेडकर वादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिप सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि राजापड़ाव क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल अनुसूचित क्षेत्र है, जहां पेसा अधिनियम 1996 लागू होता है। इसके बावजूद यहां के आदिवासी गांवों को बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-क का खुला उल्लंघन है।
बिजली नहीं तो विकास भी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है, किसानों को सिंचाई नहीं मिल पा रही है और रोजगार के अवसर भी सीमित हो गए हैं। डिजिटल सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गांवों में बिजली पहुंचाने का काम शुरू नहीं किया गया तो वे राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से बातचीत की कोशिश जारी है, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।



