
रायपुर, 7 मार्च 2026।राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार जिला अस्पतालों सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों को गर्मी से होने वाली बीमारियों के उपचार के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के तहत जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में हीट स्ट्रोक प्रबंधन कक्ष सक्रिय रखे जाएंगे। इन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस, आईवी फ्लूड, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां और शीतलन संबंधी व्यवस्थाएं उपलब्ध रखने को कहा गया है, ताकि गर्मी से प्रभावित मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।
रायपुर और दुर्ग जिला अस्पतालों में समुचित सुविधाओं से युक्त ऊष्मा आघात कक्ष बनाए जा चुके हैं, वहीं अन्य जिलों में भी ऐसे कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एम्बुलेंस सेवाओं को अलर्ट मोड में रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. स्मृति देवांगन ने बताया कि अत्यधिक तापमान के संपर्क में आने से शरीर में हीट स्ट्रेस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे हीट रैश, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक प्यास और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर हीट स्ट्रोक की स्थिति बन जाती है, जिसे चिकित्सकीय आपातकाल माना जाता है।
हीटवेव से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनने तथा दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचने की सलाह दी गई है। बाहर जाते समय सिर ढककर रखना, नींबू पानी, छाछ और मौसमी फलों का सेवन करना भी शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को गर्मी से अधिक जोखिम वाला वर्ग माना गया है। यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाकर आपातकालीन सेवा 108 के माध्यम से चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए समय पर सावधानी और जागरूकता सबसे प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों को भी बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।



