छत्तीसगढ़

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस: अधूरी सिंचाई परियोजनाएं समय-सीमा में हों पूरी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, 23 जनवरी 2026।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों की समृद्धि और प्रदेश के विकास के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लंबे समय से लंबित सिंचाई परियोजनाओं में अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक लेते हुए मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यों, संचालित एवं प्रस्तावित परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से लंबे समय से अधूरी परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है और इन्हें समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में पूर्ण होने वाली परियोजनाओं के लिए बजट की कोई कमी नहीं है, इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों से संचालित सिंचाई प्रणालियों को देखकर किसान उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में बेहतर नवाचार हो रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों को भी अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाए, ताकि वे नई तकनीकों से अवगत हो सकें।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाएं चरणबद्ध रूप से पूर्ण की जाएंगी, जिससे करीब 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च–मई में भूमिपूजन प्रस्तावित है, जिनमें—

  • बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना
  • मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना
  • रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना
  • गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं।

इसके अलावा अटल सिंचाई योजना के तहत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिससे लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित होगी।

बैठक में अंतरराज्यीय जल विवादों पर भी चर्चा हुई। महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र और समक्का बैराज से जुड़े मामलों के समाधान के लिए अगले तीन वर्षों में ठोस प्रयास करने पर सहमति बनी।

बैठक में प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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Manish Tiwari

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