राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 में खर्च विवाद: कांग्रेस की याचिका हाईकोर्ट में मंजूर, प्रशासनिक फैसलों की न्यायिक समीक्षा होगी

रायपुर, 13 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 आयोजन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप अब हाईकोर्ट तक पहुँच गए हैं। कांग्रेस की ओर से दायर याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने मामले की पहली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को तय की है।
हाईकोर्ट में याचिका स्वीकार होने के बाद जंबूरी से जुड़े खर्च, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा होगी।
आयोजन शुरू से विवादों में रहा
जंबूरी 2026 का आयोजन प्रारंभ से ही विवादों में रहा है। कांग्रेस ने इससे पहले मामले को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और EOW कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई थी। प्रतिनिधिमंडल ने EOW से पूरे प्रकरण की जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी।
टेंडर से पहले शुरू हुआ निर्माण कार्य
बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित इस आयोजन में टेंट, भोजन, टॉयलेट, बिजली और फोटोग्राफी जैसी व्यवस्थाओं के लिए टेंडर 5 जनवरी 2026 को खोला गया। हालांकि रायपुर की फर्म “अमर भारत किराया भंडार” ने टेंडर खुलने से लगभग एक महीने पहले ही स्थल पर कार्य शुरू कर दिया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल अस्थायी टॉयलेट के लिए ही 2 करोड़ रुपए से अधिक खर्च करना विवादित है। 400 अस्थायी टॉयलेट की दर 22 हजार रुपए प्रति टॉयलेट तय की गई थी, जबकि इतनी राशि में स्थायी आरसीसी टॉयलेट बनाए जा सकते थे।
अन्य व्यवस्थाओं में अनियमितता
टेंट, वीआईपी कुर्सियां, डिनर टेबल, चेयर कवर और वॉश बेसिन जैसी व्यवस्थाओं में बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत तय की गई। 340 टेंट के लिए प्रति टेंट 19 हजार रुपए और 100 वीआईपी डिनर टेबल के लिए प्रति टेबल 12,500 रुपए तय किए गए।
आयोजन स्थगित, विवाद और बढ़ा
टेंडर विवाद के बाद बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी आयोजन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 करोड़ रुपए सीधे जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद के खाते में ट्रांसफर किए गए, जो संस्था की स्वायत्तता और वित्तीय नियमों के उल्लंघन में आता है।
हाईकोर्ट में अब इन सभी आरोपों पर सुनवाई होगी और जंबूरी 2026 से जुड़े पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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