Elephant Calf Death : तालाब में डूबकर हाथी शावक की मौत, ग्रामीणों ने कराया पूजा-पाठ और मृत्युभोज

रायगढ़, 3 फरवरी 2026/ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के बंगुरसिया सर्किल में तालाब में डूबकर हाथी शावक की मौत के बाद इंसान और वन्यजीव के रिश्ते की अनोखी मिसाल देखने को मिली। शावक की मृत्यु से व्यथित ग्रामीणों ने तालाब का शुद्धिकरण कराते हुए उसकी आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ और दशकर्म कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान ग्रामीणों के साथ वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने बताया कि शावक की मौत के बाद हाथियों का एक दल कई दिनों तक आसपास के जंगल में डेरा डाले रहा। रात के समय हाथियों की चिंघाड़ से गांव में शोक का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसे हाथियों के दुख की अभिव्यक्ति मानते हुए सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि शावक की आत्मा की शांति के लिए परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ दशकर्म किया जाएगा।
19 दिसंबर की रात हुआ था हादसा
जानकारी के अनुसार 19 दिसंबर 2025 की रात करीब 32 हाथियों का दल बड़झरिया तालाब में नहाने पहुंचा था। इसी दौरान एक शावक गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। रात करीब 10 से 11 बजे हाथियों की चिंघाड़ सुनाई दी। वन विभाग के कर्मचारियों ने देखा कि बड़े हाथी शावक को पैरों से उठाने की कोशिश कर रहे थे। शावक की मौत के बावजूद हाथियों का झुंड कई दिनों तक उसी क्षेत्र में बना रहा।
धान मंडी में नुकसान, फिर भी ग्रामीणों ने दिखाई संवेदनशीलता
हाथियों की मौजूदगी के कारण धान मंडी में रखी धान की बोरियों को नुकसान पहुंच रहा था, लेकिन ग्रामीणों ने किसी तरह का टकराव न करते हुए वन और वन्यप्राणियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। बैठक कर यह तय किया गया कि जनहानि से बचाव और हाथियों के संताप को शांत करने के उद्देश्य से पूजा-पाठ और मृत्युभोज का आयोजन किया जाएगा।
रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण भजन-कीर्तन करते हुए घटनास्थल पहुंचे। बैगा द्वारा पूजा-अर्चना कराई गई, इसके बाद मृत्युभोज कराया गया। कार्यक्रम में बंगुरसिया पूर्व की फॉरेस्टर प्रेमा तिर्की, परिसर रक्षक विजय ठाकुर, बंगुरसिया पश्चिम के आरएफओ ज्योति ध्रुव सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।
आपसी सहयोग से जुटाई गई धनराशि
ग्रामीणों ने शावक के दशकर्म के लिए आपसी सहयोग से धनराशि एकत्र की। गांव के प्रत्येक घर से स्वेच्छा से अनुदान लिया गया। इसके बाद शिव-गणेश मंदिर में भजन-कीर्तन किया गया और सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया गया।
यह घटना इंसान और वन्यजीवों के बीच संवेदनशील संबंध और सहअस्तित्व की भावना की एक अनूठी मिसाल बन गई है।



