SDM की पिटाई से आदिवासी की मौत, सस्पेंड: बलरामपुर में देर रात अंतिम संस्कार; 4 गिरफ्तार, और लोगों की तलाश

बलरामपुर, 18 फरवरी। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के हंसपुर गांव में आदिवासी ग्रामीण की कथित पिटाई से मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। कुसमी के एसडीएम करूण डहरिया को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया है। मामले में एसडीएम सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मृतक का अंतिम संस्कार मंगलवार देर रात गांव में किया गया।
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार, रविवार देर शाम कुसमी एसडीएम करूण डहरिया राजस्व टीम के साथ हंसपुर गांव पहुंचे थे। टीम बॉक्साइट के कथित अवैध उत्खनन की जांच कर रही थी। आरोप है कि इसी दौरान एसडीएम, नायब तहसीलदार और उनके साथ आए कुछ युवकों ने तीन ग्रामीणों के साथ मारपीट की।
मारपीट में घायल रामनरेश राम (60) की हालत रास्ते में बिगड़ गई। उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दो अन्य घायल अजीत उरांव (60) और आकाश अगरिया (20) का इलाज जारी है।
ग्रामीणों का आरोप: अवैध खनन के विरोध पर कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि हंसपुर क्षेत्र में लंबे समय से बॉक्साइट का अवैध उत्खनन हो रहा था और इसका विरोध किया जा रहा था। रविवार को ग्रामीणों ने कथित रूप से एक ट्रक को रोका था। इसी सूचना पर एसडीएम अपने वाहन और एक अन्य निजी गाड़ी से गांव पहुंचे। आरोप है कि सायरन बजाते हुए पहुंचे लोगों ने गांव में दहशत फैलाई और निर्दोष ग्रामीणों की पिटाई की।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि घटना में अन्य लोग भी शामिल थे, जिनकी पहचान की जा रही है।
धरना-प्रदर्शन के बाद हुआ अंतिम संस्कार
सोमवार को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने शव नहीं लिया। मंगलवार को सर्व आदिवासी समाज और कांग्रेस ने कुसमी में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद देर शाम शव गांव पहुंचा। शव की स्थिति बिगड़ने के कारण रात में ही अंतिम संस्कार किया गया।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। कांग्रेस ने इस मामले में 10 सदस्यीय जांच समिति गठित की है और प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
4 आरोपी गिरफ्तार, सेंट्रल जेल शिफ्ट होंगे एसडीएम
पुलिस ने हत्या के आरोप में एसडीएम करूण डहरिया, विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है और मोबाइल लोकेशन खंगाली जा रही है।
सुरक्षा कारणों से एसडीएम को रामानुजगंज जेल से अंबिकापुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया जा रहा है। निलंबन अवधि में उन्हें सरगुजा कमिश्नर कार्यालय से अटैच किया गया है। वे 2019 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी बताए जा रहे हैं।
मामले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है। आदिवासी संगठनों और राजनीतिक दलों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।



