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CJI सूर्यकांत ने छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ई-स्मारिका का किया डिजिटल विमोचन, होटल बेबीलॉन कैपिटल में गरिमामय समारोह

रायपुर, 22 फरवरी 2026।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा आज होटल बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के सम्मान में गरिमामय अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा तथा न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ई-स्मारिका का डिजिटल विमोचन किया। “Nurturing the Future of the Judiciary” शीर्षक वाली यह डिजिटल प्रकाशन वर्ष 2003 में स्थापना के बाद से अकादमी की उत्कृष्ट यात्रा का दस्तावेज प्रस्तुत करती है।

स्वागत भाषण में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का अभिनंदन करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों और न्यायिक निष्पक्षता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता संपूर्ण न्यायिक समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि ई-स्मारिका अकादमी की परिवर्तनकारी यात्रा का सजीव दस्तावेज है, जो न्यायिक शिक्षा, आधारभूत संरचना के विकास और डिजिटल युग के अनुरूप अनुकूलन को दर्शाती है।

उन्होंने न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा तथा न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा का भी स्वागत करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व विधि के शासन के प्रति समर्पण का प्रतीक है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा का उच्च न्यायालय से जुड़ाव स्थानीय न्यायाधीशों और अधिवक्ता समुदाय को निरंतर प्रेरित करता है।

अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे अवसर संस्थाओं के लिए आत्मचिंतन और सामूहिक गौरव के क्षण होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक न्यायाधीश को संवैधानिक मूल्यों का संरक्षक बनकर सिद्धांतों में अडिग और आचरण में संतुलित रहना चाहिए। न्यायालय स्वयं को समाज से पृथक नहीं कर सकते, अन्यथा अप्रासंगिक होने का जोखिम उत्पन्न होता है। उच्च न्यायालय को दंतेवाड़ा, बस्तर, सरगुजा सहित राज्य के प्रत्येक जिले तक अपनी संवेदनशीलता का विस्तार करना चाहिए।

उन्होंने छत्तीसगढ़ के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़” को पारंपरिक रूप से “छत्तीस किलों की भूमि” कहा जाता है। ये किले केवल रक्षा संरचनाएँ नहीं, बल्कि शासन और सामुदायिक जीवन के केंद्र थे। इसी संदर्भ में उन्होंने संवैधानिक न्यायालयों को लोकतंत्र के आधुनिक किले बताते हुए कहा कि वे भूभाग की नहीं, बल्कि अधिकारों और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय देश की अपेक्षाकृत युवा संवैधानिक संस्थाओं में से एक है, किंतु उसने उच्च मानदंड स्थापित किए हैं। न्यायिक अकादमी को उन्होंने भावी न्यायिक शक्ति के निर्माण का केंद्र बताया और कहा कि भौगोलिक दूरी या दुर्गमता के कारण किसी नागरिक को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के स्वागत भाषण से हुआ तथा समापन न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समारोह में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समस्त न्यायमूर्तिगण, न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी (तेलंगाना उच्च न्यायालय), विधि विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारी, रायपुर जिला के न्यायाधीश एवं उच्च न्यायालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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Manish Tiwari

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