एनसीईआरटी मानकों पर ही छत्तीसगढ़ की किताबें: कागज, वजन और खर्च पर फैले भ्रम पर पाठ्यपुस्तक निगम का बड़ा खुलासा

रायपुर, 2 जनवरी 2026।छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए छपने वाली स्कूल किताबों को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ कर दी है। निगम ने कहा है कि प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक की सभी पुस्तकें पूरी तरह एनसीईआरटी आधारित होंगी और उनका मुद्रण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप किया जा रहा है।
निगम के अनुसार, एनसीईआरटी नई दिल्ली और एससीईआरटी रायपुर के बीच 15 अक्टूबर 2025 को हुए अनुबंध के तहत किताबों के अंदरूनी पन्नों के लिए 80 GSM पेपर और कवर के लिए 220 GSM पेपर अनिवार्य है। यही कारण है कि कक्षा 1 से 8 तक 80 GSM और कक्षा 9-10 के लिए 70 GSM कागज का उपयोग किया जा रहा है।
विषयों की संख्या बढ़ी, इसलिए किताबें भी बढ़ीं
नई शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा 4 और 7 में नए विषय जोड़े गए हैं।
इसी कारण —
| सत्र | विषयों की संख्या |
|---|---|
| 2025-26 | 134 |
| 2026-27 | 144 |
यानी 10 नए विषय जोड़े गए हैं, जिसके चलते किताबों और कागज की जरूरत स्वाभाविक रूप से बढ़ी है।
कागज की मात्रा में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं
पाठ्यपुस्तक निगम ने बताया:
- 2025-26 में
2 करोड़ 65 लाख किताबें
लगभग 11,000 मीट्रिक टन कागज में छपीं - 2026-27 में भी
लगभग उतनी ही मात्रा – 11,000 मीट्रिक टन कागज की जरूरत
👉 यानी “कागज की भारी बढ़ोतरी” का दावा भ्रामक है।
क्या बच्चों के बस्ते का वजन बढ़ेगा?
निगम ने 14% वजन बढ़ने के दावों को सिरे से खारिज किया है।
कहा गया कि बस्ते का वजन सिर्फ GSM पर नहीं, बल्कि —
- विषयों की संख्या
- पन्नों की संख्या
- डिजिटल कंटेंट
- सालाना वितरण व्यवस्था
पर निर्भर करता है।
सरकार और एससीईआरटी द्वारा डिजिटल लर्निंग और चरणबद्ध वितरण के जरिए छात्रों का बोझ नियंत्रित रखा जा रहा है।
छपाई में सिर्फ बड़ी और अनुभवी कंपनियों को मौका
निविदा प्रक्रिया में सख्त शर्तें रखी गई हैं —
✔ GST विभाग का क्लियरेंस
✔ न्यूनतम 42,000 मीट्रिक टन पेपर सप्लाई का अनुभव
✔ NCERT गुणवत्ता मानकों का पालन
ताकि बच्चों तक घटिया किताबें न पहुंचें।
निगम ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने स्पष्ट किया:
“कागज, खर्च और वजन को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम पूरी तरह तथ्यहीन है। सभी फैसले राज्य शासन, एससीईआरटी और एनसीईआरटी के निर्देशों के अनुसार लिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं।”



