Chhattisgarh NGO Scam: 15 साल, 14 किरदार, सैकड़ों करोड़ का घोटाला | CBI के शिकंजे में पूर्व मंत्री और IAS अफसर

रायपुर, 04 अक्टूबर 2025
छत्तीसगढ़ के समाज कल्याण विभाग से जुड़ा सबसे बड़ा NGO घोटाला उजागर हुआ है। पिछले 15 साल में 14 प्रमुख किरदारों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के फंड का दुरुपयोग किया। इस घोटाले में पूर्व मंत्री, BJP विधायक, 7 रिटायर्ड IAS अफसर और 6 अन्य अधिकारी रडार पर हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब CBI की टीम मामले की जांच में सक्रिय हो गई है।
मुख्य आरोपी और खेल
NGO के डिप्टी डायरेक्टर राजेश तिवारी इस घोटाले का सबसे बड़ा किरदार हैं। उनके सिग्नेचर से SRC NGO के खाते में बिना किसी रोक-टोक के करोड़ों रुपये ट्रांसफर हुए। तिवारी संविदा पर रहते हुए भी कई अहम पदों पर बने रहे और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के फंड को डायवर्ट किया। उनके खाते में पिछले 32 साल की पेंशन तक शामिल है।
मंत्रियों को 15 साल तक नहीं लगी भनक
2004 से 2018 तक महिला एवं बाल विकास विभाग में 3 मंत्री बदले – रेणुका सिंह, लता उसेंडी और रमशीला साहू – लेकिन स्कैम की फाइल कभी उनके पास नहीं पहुंची। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री स्तर पर किसी को भी इस घोटाले की जानकारी नहीं हुई।
कैसे हुआ फंड ट्रांसफर
दस्तावेजों के अनुसार, त्रि-स्तरीय पंचायतों की मदद, वृद्धा पेंशन, सामाजिक सुरक्षा निधि समेत कई केंद्रीय और राज्य योजनाओं के पैसे सीधे NGO के खाते में ट्रांसफर किए गए। राशि पहले शासकीय स्कूलों और विभागीय मदों में जाती रही, लेकिन वहां से SRC NGO के खाते में डाल दी जाती थी।
अनियमितताएं और अफसरों की मिलीभगत
- राजेश तिवारी ने बिना अनुमति SBI में NGO खाता खुलवाया और वित्तीय दस्तावेज नहीं रखे।
- पंकज वर्मा और हरमन खलखो ने ऑडिट नहीं करवाया और विभागीय नोटिस का जवाब नहीं दिया।
- 15 साल में किसी भी मंत्री को फाइल तक नहीं पहुंची, विभागीय अफसरों ने दस्तावेज दबा कर रखे।
CBI की कार्रवाई
CBI की जांच प्रारंभिक चरण में है और 15 दिन के भीतर सभी दस्तावेज जब्त करने का काम जारी है। अब फाउंडर, RAS अफसर, जिला स्तर के अधिकारी और ऑडिट रोकने वाले कर्मचारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
स्कैम में जुड़े प्रमुख नाम
- NGO फाउंडर: पूर्व मंत्री और IAS अफसर
- वित्त और समाज कल्याण विभाग के RAS अफसर
- जिला स्तर के अधिकारी
- SRC में डबल सैलरी वाले कर्मचारी
- ऑडिट रोकने वाले अधिकारी
छत्तीसगढ़ का यह NGO घोटाला सत्ता और अफसरशाही के गलियारों तक फैला है, और अब CBI की जांच में कई बड़े नाम फंस सकते हैं।



