
रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत मंजूर कर दी। जमानत की शर्तों के तहत लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, हालांकि पेशी के दौरान वे राज्य में आ सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराना और अपना पता तथा मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
बता दें कि शराब घोटाला मामले में लखमा पिछले एक साल से जेल में बंद थे। उन पर 70 करोड़ रुपए के शराब घोटाले का कमीशन लेने का आरोप था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बाक्ची और जस्टिस पंचोली की बेंच ने ईडी और ईओडब्ल्यू में दर्ज मामलों की सुनवाई के बाद लखमा को अंतरिम जमानत दी।
पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी 15 जनवरी 2025 को हुई थी। ED ने उन्हें रिमांड पर 7 दिन पूछताछ के लिए लिया और इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। तब से लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।
ED का आरोप है कि लखमा शराब सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे और उन्होंने छत्तीसगढ़ में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत करवाई। उनके निर्देश पर सिंडिकेट कार्य करता था। ED के मुताबिक लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
ED ने दावा किया कि इस घोटाले से राज्य के सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और सिंडिकेट के लोगों की जेबों में 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई हुई। इसके तहत नेताओं, कारोबारी और अधिकारियों ने अवैध कमाई की।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले की जांच ED कर रही है। FIR में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले की बात की गई है। ED ने पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
सालभर बाद अब कवासी लखमा जेल से बाहर होंगे और अंतरिम जमानत के तहत वे अपनी पेशियों में कोर्ट में हाजिर रहेंगे।



