
विशेष रिपोर्ट | डॉ. स्नेहल गोस्वामी, सलाहकार – कार्डियोलॉजी (वयस्क)
भारत में दिल का दौरा अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है। 2020 से 2023 के बीच देशभर के अस्पतालों के आंकड़े बताते हैं कि हार्ट अटैक के करीब 50% मरीज 40 साल से कम उम्र के हैं। यही नहीं, आपातकालीन कक्षों में 20–30 वर्ष के युवा भी गंभीर हृदय समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं—जो पहले दुर्लभ माना जाता था। डॉक्टर इसे एक “खामोश चेतावनी” बता रहे हैं।
युवा, फिट दिखते हैं—फिर भी जोखिम में
चिंता की बात यह है कि कई मरीज सक्रिय पेशेवर होते हैं, जिनमें मोटापा, लंबे समय से डायबिटीज या दशकों का धूम्रपान जैसे पारंपरिक जोखिम नहीं दिखते। इसके बावजूद वे अचानक सीने में दर्द, सांस फूलना या बेहोशी के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। शुरुआती जांच में क्षति स्पष्ट न होने से इलाज और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जीवनशैली बनी सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार अनियमित दिनचर्या, लंबे कार्य घंटे, तनाव, नींद की कमी और जंक फूड का बढ़ता सेवन युवाओं के दिल पर भारी पड़ रहा है। लगातार तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, सूजन और नींद की गड़बड़ी होती है—ये सभी हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाते हैं।
शराब और धूम्रपान खतरे को कई गुना बढ़ाते हैं
छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में शराब का नियमित सेवन एक बड़ा जोखिम कारक बनकर उभरा है। अत्यधिक शराब रक्तचाप बढ़ाती है, हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करती है और खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है। वहीं युवाओं में धूम्रपान, वेपिंग और “सोशल स्मोकिंग” को हल्के में लिया जाता है, जबकि ये धमनियों को नुकसान पहुंचाकर अचानक दिल के दौरे की वजह बन सकते हैं।
वायु प्रदूषण और छुपी बीमारियां
शहरी इलाकों में बढ़ता वायु प्रदूषण (PM2.5) भी हृदय रोग का खतरा बढ़ा रहा है। इसके साथ ही कम उम्र में शुरू होने वाली साइलेंट बीमारियां—जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज—अक्सर बिना लक्षण के वर्षों तक नुकसान करती रहती हैं।
लक्षण अलग, पहचान में देरी
युवा मरीजों में दिल के दौरे के लक्षण पारंपरिक नहीं होते। सीने के दर्द की जगह पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द, मतली, चक्कर या असामान्य थकान दिख सकती है। इन्हें नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।
रोकथाम संभव है
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और तंबाकू-शराब से दूरी रखकर जोखिम काफी कम किया जा सकता है। 30 की उम्र से पहले भी सालाना हृदय और मेटाबॉलिक जांच जरूरी है।
हृदय उम्र नहीं देखता, जीवनशैली देखता है। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो सबसे ऊर्जावान मानी जाने वाली पीढ़ी सबसे ज्यादा असुरक्षित हो सकती है। छोटे बदलाव आज—बड़ी सुरक्षा कल।



