
रायपुर, 10 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2021–22 भर्ती घोटाले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार की परतें खुलती जा रही हैं। CBI की पूरक चार्जशीट में सामने आया है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से जुड़ा वसूली नेटवर्क उनकी पत्नी के NGO से लेकर कोचिंग संस्थानों तक फैला हुआ था।
CBI के मुताबिक सोनवानी की पत्नी के NGO GVS के जरिए बजरंग पावर से 50 लाख रुपये की वसूली की गई। इसी NGO में CGPSC के सहायक परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर को कोषाध्यक्ष बनाया गया था।
अब इस घोटाले में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि उसने अभ्यर्थियों से करीब सवा करोड़ रुपये वसूले। प्री परीक्षा पास कराने और फिर मेंस परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 5 से 10 लाख रुपये मांगे गए।
CBI को दिए गए बयान में सरकारी गवाह वी. चंद्राकर ने बताया कि अभ्यर्थियों को रायपुर के सिद्धि विनायक पैलेस में प्री परीक्षा की छपी हुई कॉपी दी गई थी। नतीजा आया तो सभी पास हो गए, जिससे नेटवर्क पर भरोसा और बढ़ गया। लेकिन मेंस परीक्षा के लिए अतिरिक्त पैसे न देने पर सभी को फेल करा दिया गया।
CBI की चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ है कि टामन सोनवानी और तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने 2020 से 2022 के बीच पदों का दुरुपयोग कर अपने बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों का चयन कराया।
अब CBI टामन सिंह सोनवानी की पत्नी की भूमिका को लेकर गंभीर है और गिरफ्तारी की पूरी संभावना जताई जा रही है।



