
कोरबा, 12 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से किसान व्यवस्था की भयावह तस्वीर सामने आई है। धान बेचने के लिए टोकन नहीं मिलने से परेशान एक किसान ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या की कोशिश कर ली। किसान की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पीड़ित किसान की पहचान कोरबी गांव निवासी 40 वर्षीय सुमेर सिंह गोड़ के रूप में हुई है। सुमेर सिंह ने करीब 3 एकड़ 75 डिसमिल जमीन खरीदी थी और 68 क्विंटल से अधिक धान बेचने के लिए पिछले डेढ़ महीने से लगातार टोकन कटवाने की कोशिश कर रहे थे।
लेकिन मोबाइल फोन नहीं होने और ऑनलाइन प्रक्रिया की मजबूरी के कारण उनका टोकन नहीं बन पाया। वे दुकानों, पटवारी कार्यालय, तहसील कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली।
असहाय होकर किसान ने उठाया खौफनाक कदम
स्थानीय निवासी संजय श्रीवास्तव के मुताबिक किसान ने पीए के माध्यम से आवेदन दिया और जनदर्शन में भी शिकायत की थी, लेकिन फिर भी उसका धान बिक्री टोकन जारी नहीं किया गया। प्रशासनिक लापरवाही से टूट चुके किसान ने आखिरकार यह खौफनाक कदम उठा लिया।
रात 1 बजे पी लिया ज़हर
किसान की पत्नी मुकुंद बाई ने बताया कि देर रात करीब 1 बजे उनके पति ने कीटनाशक पी लिया। गिलास गिरने की आवाज सुनकर वे मौके पर पहुंचीं और पड़ोसियों की मदद से पहले हरदी बाजार स्वास्थ्य केंद्र और फिर हालत बिगड़ने पर जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया।
सांसद ज्योत्सना महंत पहुंचीं अस्पताल
घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत अस्पताल पहुंचीं और किसान से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद और शर्मनाक बताया।
सांसद ने कहा —
“जहां आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, वहीं एक आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर हो रहा है। जब हमारे अन्नदाता सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य कैसे सुरक्षित रह सकता है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में हजारों किसानों को टोकन नहीं मिल रहा, रकबा नहीं जुड़ रहा और धान नहीं बिक पा रहा, जिससे किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे हैं।
प्रशासन जांच में जुटा
फिलहाल किसान का इलाज जारी है और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लेकिन यह घटना धान खरीदी व्यवस्था की सच्चाई और किसानों की बदहाली को उजागर कर गई है।



