
बिलासपुर, 11 मार्च 2026/ प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपित पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास की जमानत हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने कहा कि आर्थिक अपराध में आरोपी की मुख्य भूमिका है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
हालांकि दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने आरोपी दीपेन चावड़ा की जमानत मंजूर कर दी। अदालत ने कहा कि दीपेन चावड़ा ने राज्य के खजाने को सुरक्षित रखने के अपने कर्तव्य के विपरीत कोई गैर-कानूनी कार्रवाई की थी।
जानकारी के अनुसार, निरंजन दास ने राज्य शासन और ईडी के अलग-अलग मामलों में जमानत आवेदन लगाया था। उनके वकील ने हाईकोर्ट में बताया कि उन्हें एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। निरंजन दास तब से न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी के वकील डॉ. सौरभ पांडेय ने कहा कि आबकारी विभाग के मंत्री कवासी लखमा को भी जमानत नहीं मिली थी और निरंजन दास पूरे विभाग में शीर्ष पद पर रहते हुए अनियमितताओं को रोकने में विफल रहे। इसी आधार पर जमानत खारिज की गई।
दीपेन चावड़ा के खिलाफ आरोप शराब पॉलिसी और स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन के कामकाज से जुड़े हैं। कमर्शियल टैक्स विभाग की जांच में उनके खिलाफ कोई गैर-कानूनी बात नहीं पाई गई, इसलिए उनकी जमानत मंजूर की गई।



