1000 करोड़ के SRC घोटाले पर CBI की एंट्री, हाईकोर्ट आदेश के बाद समाज कल्याण विभाग से जब्त किए दस्तावेज

रायपुर, 06 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद आज सीबीआई (CBI) की टीम ने राजधानी रायपुर के माना स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर में दबिश दी। इस दौरान अधिकारियों ने विभाग के उप संचालक से मुलाकात कर घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए और अपने साथ ले गए। यह कार्रवाई हाईकोर्ट द्वारा राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान (SRC) से जुड़े करीब 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश के बाद की गई है।
हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
24 सितंबर को हाईकोर्ट की डबल बेंच (जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल) ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा था कि यह स्थानीय एजेंसियों या पुलिस जांच के दायरे का विषय नहीं है। कोर्ट ने इसे संगठित और सुनियोजित अपराध करार देते हुए सीबीआई को 15 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया था।
किन अधिकारियों पर आरोप
इस घोटाले में 6 IAS अधिकारियों के नाम सामने आए हैं—
- विवेक ढांड (पूर्व मुख्य सचिव)
- आलोक शुक्ला
- एमके राउत
- सुनील कुजूर
- बीएल अग्रवाल
- पीपी सोती
इनके अलावा राज्य सेवा अधिकारियों में सतीश पांडेय, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा पर भी आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला
यह घोटाला 2017 में दायर एक जनहित याचिका (PIL) से सामने आया। रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने याचिका में आरोप लगाया था कि स्टेट रिसोर्स सेंटर फॉर डिसेबल्ड (SRC) नामक संस्था केवल कागजों पर मौजूद थी और 2004 से 2018 तक इसके नाम पर करीब 1,000 करोड़ रुपये का दुरुपयोग हुआ।
याचिका में यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता का नाम तक एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारी के रूप में दर्ज कर दिया गया था, जबकि अस्पताल वास्तव में किसी एनजीओ द्वारा संचालित था।
घोटाले के तरीके
- SRC के बैंक खातों से (Bank of India और SBI मोतीबाग शाखा) फर्जी आधार कार्ड के जरिए करोड़ों रुपये निकाले गए।
- अस्पताल के नाम पर मशीनरी और रखरखाव में भारी खर्च दिखाया गया।
- तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह ने शपथ-पत्र में 150-200 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का खुलासा किया।
अब CBI इस पूरे घोटाले की तहकीकात करेगी और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे संभव माने जा रहे हैं।



