
रायपुर, 26 मार्च 2026। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के सफल और भव्य आयोजन के बाद छत्तीसगढ़ अब देश के खेल नक्शे पर नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस आयोजन से मिले आत्मविश्वास के साथ राज्य सरकार ने केंद्र के सामने बड़े विजन के साथ अपनी मांगें रखी हैं। राज्य ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और स्पोर्ट्स साइंस सेंटर जैसी विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं की स्थापना की मांग की है, ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को अपने ही प्रदेश में उच्च स्तर का प्रशिक्षण और संसाधन मिल सकें।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने यह महत्वपूर्ण घोषणा भी की कि 2027 में भी छत्तीसगढ़ को खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का अवसर मिलेगा, जो राज्य के लिए लगातार दूसरी बड़ी उपलब्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों—खासकर बस्तर और सरगुजा—में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि इन प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं और सही मार्गदर्शन मिले, तो ये खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने ‘खेल उत्कर्ष मिशन’ के तहत 100 करोड़ रुपये के प्रावधान का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार खेलों को प्राथमिकता दे रही है और यह प्रतिबद्धता बजट में भी स्पष्ट दिखाई देती है।
राज्य में खेलों को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए आयोजित बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक की सफलता भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। इन आयोजनों में लाखों लोगों की भागीदारी ने यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के प्रति अभूतपूर्व उत्साह है। बस्तर ओलंपिक में करीब 4 लाख प्रतिभागी शामिल हुए, जबकि सरगुजा ओलंपिक में 3.5 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्र सरकार के समक्ष विस्तृत खेल विकास योजना प्रस्तुत की। उन्होंने रायपुर में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना, बिलासपुर में अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, अंबिकापुर में नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और दुर्ग व अंबिकापुर में एथलेटिक्स के लिए विशेष सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पोषण, फिटनेस और आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा।
मुख्य सचिव विकास शील ने भी इस मौके पर छत्तीसगढ़ को भविष्य में नेशनल गेम्स की मेजबानी देने की मांग रखी, जिससे राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिल सके।
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की सक्रिय भूमिका भी प्रदेश में खेल विकास को गति दे रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में 33 खेलो इंडिया सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां लगभग 990 खिलाड़ियों को वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल, तीरंदाजी, हॉकी, कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य को खेल अधोसंरचना के विकास के लिए 20.17 करोड़ रुपये की राशि भी जारी की जा चुकी है।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने में अस्मिता लीग और फिट इंडिया अभियान की भूमिका भी अहम रही है। अस्मिता लीग के तहत अब तक 124 प्रतियोगिताएं आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें लगभग 14 हजार लड़कियों ने हिस्सा लिया है। इससे प्रदेश में महिला खिलाड़ियों को नया मंच और आत्मविश्वास मिला है। वहीं ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ अभियान के अंतर्गत 18,776 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 2 लाख से अधिक लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
विशेष रूप से बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खेलों के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। खेल गतिविधियों ने युवाओं को नई दिशा दी है और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ अब खेलों को सिर्फ प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि इसे सामाजिक बदलाव, युवा सशक्तिकरण और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का सशक्त माध्यम बना रहा है। आने वाले वर्षों में राज्य का यह खेल मॉडल देश के लिए मिसाल बन सकता है।



