एक देश-एक चुनाव पर बड़ा बयान : संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का उल्लंघन नहीं – पूर्व CJI बीआर गवई

नई दिल्ली। “वन नेशन, वन इलेक्शन” को लेकर चल रही संसदीय प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई ने अहम राय देते हुए कहा कि एक साथ चुनाव कराने वाला प्रस्तावित कानून संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का उल्लंघन नहीं करता।
बिल संविधान के अनुरूप: पूर्व CJI
बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि “एक देश-एक चुनाव” कानून लागू होता है तो
- संघीय ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ेगा
- लोकतांत्रिक प्रणाली प्रभावित नहीं होगी
- मतदाताओं के अधिकार यथावत रहेंगे
यह प्रस्ताव आम तौर पर 129वां संविधान संशोधन विधेयक के नाम से जाना जा रहा है, जो चुनाव प्रक्रिया के समय को एकरूप करने का प्रावधान करता है।
JPC के सामने पेश हुए छठे पूर्व मुख्य न्यायाधीश
भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति के सामने पेश हुए गवई ने कहा कि संसद को ऐसा कानून बनाने का अधिकार है, भले उसका प्रभाव राज्यों पर क्यों न पड़े।
चौधरी ने भी बैठक के बाद कहा कि
सभी दलों को राजनीतिक मतभेद भुलाकर देशहित में इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए ताकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का रास्ता साफ हो।
विपक्ष की आपत्ति क्या है
विपक्षी दलों का तर्क है कि
- इससे संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा
- राज्यों की स्वायत्तता कम होगी
हालांकि कई संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार विधेयक में कोई स्पष्ट संवैधानिक त्रुटि नहीं दिखती।
पहले भी हो चुके हैं साथ-साथ चुनाव
भारत में 1967 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। बाद में अलग-अलग समय पर सरकारें गिरने और चुनाव होने से चुनाव चक्र अलग हो गया।
अब आगे क्या?
JPC की रिपोर्ट तैयार होने के बाद सरकार विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। यदि पास हुआ, तो देश में चुनावी कैलेंडर में ऐतिहासिक बदलाव संभव माना जा रहा है।



