कस्टम मिलिंग घोटाले में बड़ा खुलासा: अनवर का भरोसेमंद दीपेन चावड़ा बना ‘कैश कलेक्शन किंग’, हर 3 दिन में उठाता था 22 करोड़!

EOW की चार्जशीट में सामने आई घोटाले का पूरा ब्लैक नेटवर्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रहा है। सरकारी अनाज की मिलिंग, परिवहन और बिलिंग से जुड़े करोड़ों के इस घोटाले में अब पूरे और संगठित नेटवर्क की परतें खुल चुकी हैं। ताजा चार्जशीट ने सिस्टम के भीतर चल रहे कैश कलेक्शन और अवैध वसूली का पूरा मॉडल उजागर कर दिया है।
दीपेन चावड़ा—अनवर ढेबर का ‘कैश कलेक्शन मास्टर’
चार्जशीट के अनुसार धनबाद (झारखंड) निवासी दीपेन चावड़ा, मुख्य आरोपी कारोबारी अनवर ढेबर का सबसे भरोसेमंद आदमी था। पूरे नेटवर्क में कैश मूवमेंट, कलेक्शन से लेकर डिलीवरी तक की जिम्मेदारी उसी पर थी।
गवाह अंकुर पालीवाल और सूरज पवार के बयान में सामने आया कि उन्हें फेसटाइम लोकेशन और कोडवर्ड्स भेजकर कैश लेने भेजा जाता था।
👉 हर 3–4 दिन में 20–22 करोड़ तक का कलेक्शन किया जाता था
👉 यह प्रक्रिया लगभग 10 बार दोहराई गई
👉 इनमें से 7 बार रकम सिद्धार्थ सिंघानिया से ली गई
सारा पैसा भिलाई-दुर्ग से लेकर रायपुर तक तय स्थानों पर सप्लाई किया जाता था।
कलेक्शन के दो प्रमुख पॉइंट
चार्जशीट में दीपेन चावड़ा के बयान के अनुसार, मुख्य डिलीवरी पॉइंट थे—
1️⃣ इंडियन चिली स्क्वायर गली, शंकर नगर – यहां अनवर ढेबर के आदमी कार से पहुंचते थे।
2️⃣ वेलिंगटन कोर्ट होटल की पार्किंग – यहां विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू के लोग कैश सौंपते थे।
कैश आमतौर पर कार्टन, बैग और बोरियों में पैक रहता था। दीपेन का काम केवल सुरक्षित डिलीवरी करना था; नकदी गिनने की जिम्मेदारी उसकी नहीं थी।
मोबाइल जांच ने खोला काला सच
मोबाइल डेटा रिकवरी में एक और बड़ा खुलासा हुआ—
👉 CSPDCL का MD बनने अशोक कुमार ने, दीपेन के जरिए 13 करोड़ अनवर और अनिल टुटेजा को दिए थे
दीपेन चावड़ा उनके घर जाकर बोरियों में भरा पैसा लेकर आया था। इसके बाद अशोक की पोस्टिंग तय हुई, ऐसा चार्जशीट का दावा है।
एजेंसी ने चैट और कॉल रिकॉर्ड बरामद किए हैं, जो पिछले कार्यकाल में ट्रांसफर-पोस्टिंग में भारी वसूली की पुष्टि करते हैं।
घोटाले की प्लानिंग: तीन बड़े नाम!
EOW की चार्जशीट के अनुसार, घोटाले का मास्टर प्लान इन तीन ने बनाया—
✔ रामगोपाल अग्रवाल
✔ अनवर ढेबर
✔ अनिल टुटेजा
योजना के तहत—
▶ रोशन चंद्राकर को एसोसिएशन में पद दिलाया गया
▶ पहले प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया
▶ सीएम हाउस में बैठक में दर बढ़ाने का निर्णय लिया गया
▶ कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि को 40 से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल किया गया
इसी बढ़ी हुई राशि के आधार पर भारी अवैध वसूली का खेल चला।
पूरे नेटवर्क पर EOW की नजर
EOW का दावा है कि—
• कस्टम मिलिंग, ट्रांसपोर्टेशन और बिलिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर वसूली हुई
• कैश मूवमेंट पूरे राज्य में फैले नेटवर्क के जरिए किया गया
• रकम अलग-अलग टीमों में बांटकर मूव की जाती थी ताकि शक न हो
यह घोटाला प्रदेश की अब तक की सबसे संगठित मनी कलेक्शन मशीनरी में से एक माना जा रहा है



