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बिलासपुर ट्रेन हादसे में बड़ा खुलासा: फेल था लोको पायलट का साइको टेस्ट, फिर भी चला दी गई पैसेंजर ट्रेन — CRS जांच में रेलवे की बड़ी लापरवाही उजागर

बिलासपुर, 07 नवंबर 2025 / 4 नवंबर को गेवरा रोड में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना के बाद रेलवे प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिस लोको पायलट विद्यासागर के जिम्मे मेमू लोकल ट्रेन चलाई जा रही थी, वे रेलवे के साइकोलॉजिकल टेस्ट में असफल हो चुके थे। इसके बावजूद उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी गई, जबकि नियमों के अनुसार यह परीक्षा पास करना अनिवार्य है।

🔍 सीआरएस ने 6 नवंबर को की दिनभर पूछताछ

रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) बी.के. मिश्रा ने 6 नवंबर को हादसे से जुड़े 10 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से घंटों पूछताछ की। इनमें एरिया बोर्ड के एससीआर, एआरटी और एआरएमवी इंचार्ज, कंट्रोलर डिपार्टमेंट के अधिकारी शामिल थे। पूछताछ का सिलसिला सुबह से रात 10 बजे तक चला।

⚙️ साइको टेस्ट पास किए बिना दी गई जिम्मेदारी

विद्यासागर पहले मालगाड़ी चलाते थे। करीब एक महीने पहले उन्हें पदोन्नति देकर पैसेंजर ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। रेलवे नियमों के तहत मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन में प्रमोशन से पहले साइकोलॉजिकल टेस्ट पास करना जरूरी होता है। यह टेस्ट चालक की मानसिक संतुलन, त्वरित निर्णय क्षमता और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की जांच करता है। अधिकारियों को पता होने के बावजूद, उन्हें सहायक चालक के साथ ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी गई।

🕵️‍♂️ राहत-बचाव दल की भूमिका पर भी सवाल

सीआरएस ने जांच के दौरान एआरटी और एआरएमवी इंचार्ज अंशु कुमार और रवि किरण से भी अलग-अलग पूछताछ की। उनसे हादसे की सूचना मिलने, रवाना होने और घटनास्थल पर पहुंचने के समय की जानकारी ली गई। साथ ही यह भी पूछा गया कि राहत वेन में सभी जरूरी उपकरण मौजूद थे या नहीं।

🏥 घायल लोको पायलट और गार्ड का बयान अहम

हादसे में घायल असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज और मालगाड़ी गार्ड शैलेष चंद्र यादव का बयान अभी दर्ज नहीं हो सका है। दोनों वर्तमान में अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। सीआरएस टीम अब उनके बयान अस्पताल में ही दर्ज कर सकती है, क्योंकि ये दोनों ही हादसे के प्रत्यक्षदर्शी हैं।

🕒 11 यात्रियों की मौत, 20 घायल

4 नवंबर की शाम करीब 4 बजे गेवरा रोड के पास मेमू लोकल और खड़ी मालगाड़ी की जोरदार टक्कर में 11 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 20 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद यात्रियों को बोगियों में फंसे हुए बाहर निकाला गया। घायलों का इलाज रेलवे अस्पताल, सिम्स और अपोलो अस्पताल में जारी है।

⚠️ ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की खामी बताई जा रही वजह

स्थानीय जांच रिपोर्ट के अनुसार, हादसे की प्राथमिक वजह ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की तकनीकी खामियां और मानवीय त्रुटि मानी जा रही है। रेलवे की पांच सदस्यीय जांच टीम ने भी प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही की पुष्टि की है।


अब CRS की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी जिम्मेदारी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बावजूद ऐसे पायलट को ट्रेन चलाने की अनुमति आखिर कैसे दी गई?

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Manish Tiwari

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