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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ी राहत, टेक्सटाइल से लेकर सीफूड तक इन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा

नई दिल्ली।भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील आखिरकार 2 फरवरी को पूरी हो गई। इस अहम समझौते के बाद भारत के एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स को बड़े पैमाने पर फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। डील के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले Reciprocal Tariffs को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।

इस समझौते की घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू होगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधे तौर पर राहत मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत के बाद इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा,
“आज मेरे प्यारे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। खुशी है कि अब ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर सिर्फ 18% टैरिफ लगेगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद।”

भारी टैरिफ से टूटी थी भारतीय कंपनियों की कमर

27 अगस्त 2025 से लागू हुए भारी टैरिफ के बाद कुछ सेक्टर्स में टैक्स 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इससे भारतीय उत्पादों की कॉम्पिटिटिवनेस को बड़ा नुकसान हुआ और अमेरिका—जो भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है—वहां डिमांड पर असर पड़ा।

अब टैरिफ में कटौती से अमेरिकी बाजार में सक्रिय भारतीय कंपनियों को बेहतर मार्जिन, बढ़ी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और नए ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद है।

इन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

🔹 टेक्सटाइल और परिधान

ट्रेड डील का सबसे बड़ा फायदा टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। अमेरिका भारत के कुल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का करीब 28% हिस्सा है।
जिन कंपनियों का US में बड़ा बिज़नेस है, वहां वॉल्यूम रिकवरी और प्राइसिंग पावर बेहतर होने की संभावना है।
प्रमुख कंपनियों में इंडो काउंट इंडस्ट्रीज, किटेक्स, गोकलदास एक्सपोर्ट्स, पर्ल ग्लोबल, वेलस्पन इंडिया और हिमात्सिंगका सेइड शामिल हैं।

🔹 केमिकल्स

स्पेशलिटी केमिकल्स और इंटरमीडिएट्स सेक्टर को भी इस डील से राहत मिलेगी। टैरिफ में कटौती से नेट रियलाइजेशन बेहतर होगा।
UPL, SRF और जुबिलेंट इंग्रेविया जैसे स्टॉक्स प्रमुख लाभार्थियों में माने जा रहे हैं।

🔹 इंजीनियरिंग गुड्स

इंजीनियरिंग सामान अमेरिका को भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं। इंडस्ट्रियल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और कैपिटल गुड्स की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है।
भारत फोर्ज, रामकृष्ण फोर्जिंग और संवर्धन मदरसन जैसी कंपनियों को सीधा फायदा हो सकता है।

🔹 रत्न और आभूषण

जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर में टैरिफ कम होने से लैंडेड कॉस्ट घटेगी, जिससे मार्जिन पर दबाव कम होगा और अमेरिकी रिटेलर्स के लिए भारतीय उत्पाद और आकर्षक बनेंगे।

🔹 कंज्यूमर और आईटी सेक्टर

कंज्यूमर एक्सपोर्टर्स जैसे LT Foods, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और KRBL को धीरे-धीरे फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं IT सेक्टर को बेहतर द्विपक्षीय रिश्तों से अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

🔹 सीफूड

सीफूड सेक्टर के लिए भी यह डील राहत लेकर आई है। कम टैरिफ से डिमांड रिकवरी तेज हो सकती है। Apex Frozen Foods, Waterbase और Avanti Feeds जैसी कंपनियां प्रमुख लाभार्थी होंगी।

बाजार में बढ़ा पॉजिटिव सेंटिमेंट

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। टैरिफ में कटौती से न सिर्फ कंपनियों की कमाई सुधरेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की पकड़ भी मजबूत होगी।


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Manish Tiwari

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