भूपेश बघेल की नक्सल नीति पर बयान से मचा सियासी बवाल – डिप्टी सीएम अरुण साव का पलटवार, बोले ‘स्पष्ट करें पार्टी की राय या निजी मत’; धनतेरस पर स्वदेशी खरीदारी की अपील और राज्योत्सव रजत जयंती की तैयारियों का ऐलान

रायपुर, 18 अक्टूबर 2025
राज्य की राजनीति और जनहित से जुड़ी खबरों के बीच आज उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने तीन अहम बयान दिए — जिनमें नक्सलवाद, धनतेरस और राज्योत्सव जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल रहे।
🟥 भूपेश बघेल की तारीफ पर अरुण साव का सवाल — “ये पार्टी का स्टैंड या निजी मत?”
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही में प्रदेश सरकार की नक्सल नीति और आत्मसमर्पण अभियान की तारीफ की थी। इस पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा —
“भूपेश बघेल को स्पष्ट करना चाहिए कि यह कांग्रेस पार्टी का स्टैंड है या उनका व्यक्तिगत मत, क्योंकि उनके प्रदेश अध्यक्ष की राय बिल्कुल अलग है।”
साव ने कहा कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में नक्सलवाद बढ़ा, यहां तक कि सरगुजा भी प्रभावित हुआ।
“2018 तक नक्सलवाद सीमित था, लेकिन कांग्रेस शासन में यह पला-बढ़ा। अब प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक काम हो रहा है,” उन्होंने कहा।
🟩 धनतेरस पर डिप्टी सीएम ने दी शुभकामनाएं, स्वदेशी सामान खरीदने की अपील
अरुण साव ने प्रदेशवासियों को धनतेरस और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा —
“GST बचत उत्सव के बाद बाजारों में रौनक लौटी है, 350 से अधिक वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है। लोग स्वदेशी वस्तुएं खरीदें ताकि स्थानीय व्यापारियों की दिवाली भी उजली हो।”
उन्होंने कहा कि स्वदेशी खरीदारी से आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी।
🟦 राज्योत्सव 2025 की तैयारियां शुरू — इस बार रजत जयंती वर्ष, पीएम मोदी करेंगे शुभारंभ
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर इस बार राज्योत्सव को रजत जयंती के रूप में भव्य तरीके से मनाया जाएगा।
डिप्टी सीएम ने बताया कि राज्य स्तर पर 5 दिन और जिला स्तर पर 3 दिन का आयोजन प्रस्तावित है।
“राज्योत्सव का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे और इसी दौरान विधानसभा के नए भवन का लोकार्पण भी होगा,” साव ने बताया।
आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बैठक होगी, जिसमें राज्योत्सव की रूपरेखा और कार्ययोजना तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस बार स्थानीय कलाकारों को मंच और सम्मान दोनों दिया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पहचान मिले।



