
रायपुर, 06 अप्रैल 2026/शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल शारदा चौक से तात्यापारा चौक मार्ग का चौड़ीकरण पिछले दो दशकों से अटका हुआ है। 24 फरवरी को विधानसभा बजट में फ्लाईओवर निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए की घोषणा के बावजूद 41 दिन बाद भी निर्माण एजेंसी तय नहीं हो सकी है। नतीजा यह कि प्रोजेक्ट एक बार फिर कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।
जांच में सामने आया है कि फ्लाईओवर निर्माण को लेकर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है। दोनों ही विभाग इसे शासन स्तर का मामला बताते हुए खुद जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। इस खींचतान के कारण लंबे समय से लंबित सड़क चौड़ीकरण और नया फ्लाईओवर प्रस्ताव दोनों ही अधर में लटके हुए हैं।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब पहले ही चौड़ीकरण पर सहमति बन चुकी थी, तो बजट में अचानक फ्लाईओवर का प्रावधान क्यों जोड़ा गया। उन्होंने इसे लेकर जनता में असंतोष और आक्रोश की बात भी कही।
दो साल पहले हुए सर्वे के अनुसार इस परियोजना की जद में करीब 102 दुकानें और मकान आते हैं। उस समय मुआवजे के लिए 122 करोड़ रुपए और निर्माण के लिए 12 से 15 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान था। हालांकि नई गाइडलाइन दर लागू होने से अब लागत और बढ़ने की संभावना है। इस मार्ग से रोजाना करीब 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं, जिससे पीक आवर में 15–20 मिनट तक जाम की स्थिति बनती है।
इधर, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर नगर सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष ने मुआवजे के लिए बजट में प्रावधान नहीं होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि फ्लाईओवर बनने से प्रभावितों पर दोहरी मार पड़ेगी।
अधिकारियों के अलग-अलग दावे
- पीडब्ल्यूडी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट उनके बजट में शामिल नहीं है।
- नगर निगम का कहना है कि निर्माण पीडब्ल्यूडी को करना है।
स्पष्ट निर्णय के अभाव में 20 साल पुराना यह प्रोजेक्ट अब भी अनिश्चितता में फंसा हुआ है, जबकि शहर की ट्रैफिक समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है।



