छत्तीसगढ़

14 साल बाद 67 सब-इंजीनियरों की नियुक्ति रद्द: हाईकोर्ट का सख्त फैसला, बोला– बैकडोर एंट्री मंजूर नहीं, नियम बदलकर की गई थी भर्ती

बिलासपुर | 04 फ़रवरी 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में वर्ष 2011 में नियुक्त किए गए 67 सब-इंजीनियर (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्यता के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता और बैकडोर से की गई नियुक्तियां उसी रास्ते वापस जाएंगी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सब-इंजीनियर भर्ती में अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर सुनाया।

विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन

कोर्ट ने कहा कि यदि भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता के लिए अंतिम तिथि तय है, तो उम्मीदवार के पास उसी तारीख तक डिग्री या डिप्लोमा होना अनिवार्य है। चयन तिथि को आधार नहीं बनाया जा सकता।

साल 2011 की भर्ती प्रक्रिया में ऐसे 89 अभ्यर्थी पाए गए, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि 23 मार्च 2011 तक आवश्यक योग्यता नहीं थी।

275 पदों पर 383 नियुक्तियां

पूरा मामला ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के अंतर्गत सब-इंजीनियर के 275 पदों की भर्ती से जुड़ा है। आरोप है कि विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर 275 की जगह 383 नियुक्तियां कर दीं। इनमें से 89 अभ्यर्थी तय कट-ऑफ तिथि पर अयोग्य थे।

इस भर्ती को चुनौती देते हुए रवि तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद डिवीजन बेंच में अपील की गई।

शासन की दलील खारिज

राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि बाद में अंतिम सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्रों को मौका देने का निर्णय लिया गया था और कर्मचारी 14 वर्षों से सेवा दे रहे हैं।
हाईकोर्ट ने इन दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि लंबी सेवा अवधि किसी अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती।

2 को राहत, 67 की नियुक्ति रद्द

कोर्ट ने रिट ऑफ को-वारंटो जारी करते हुए निजी प्रतिवादी क्रमांक 4 से 73 तक की नियुक्तियां निरस्त कर दीं। हालांकि वर्षा दुबे और अभिषेक भारद्वाज को राहत दी गई, क्योंकि उन्होंने कट-ऑफ तिथि से पहले आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी कर ली थी।

वेतन की वसूली नहीं

मानवीय आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया कि 14 वर्षों तक सेवा दे चुके कर्मचारियों से अब तक दिए गए वेतन और भत्तों की वसूली नहीं की जाएगी। हालांकि नियुक्तियों को अवैध ही माना गया है।

भर्ती गड़बड़ी पर FIR भी दर्ज

इस मामले में वर्ष 2022 में रायपुर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया था कि 89 में से 19 अभ्यर्थी पहले ही पद छोड़ चुके हैं।
राज्य सरकार द्वारा गठित तीन समितियों ने भी इन नियुक्तियों को अवैध माना था, बावजूद इसके कार्रवाई नहीं हुई।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की गंभीर चूक पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और नियमों की अनदेखी से कई अभ्यर्थी अब उस उम्र में पहुंच चुके हैं, जहां दूसरी शासकीय सेवाओं के अवसर सीमित हो गए हैं।


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Manish Tiwari

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