राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी सुर और बॉलीवुड का धमाल: आदित्य नारायण ने गीतों से बांधा समा, सुनील तिवारी और ‘चिन्हारी गर्ल बैंड’ ने लोकसंगीत से सजाई सुरमई शाम

रायपुर, 3 नवम्बर 2025।छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य राज्योत्सव की शाम बॉलीवुड के सुर और छत्तीसगढ़ी लोकधुनों से सराबोर रही। ‘सुरमई शाम’ में गीत, संगीत और नृत्य का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा पंडाल तालियों की गूंज से गूंज उठा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत प्रख्यात लोकगायक सुनील तिवारी की प्रस्तुति से हुई। चक्रधर कला सम्मान (2021) से सम्मानित तिवारी ने “मोर भाखा के संग दया मया के सुघ्घर हवे मिलाप रे” और “अइसन छत्तीसगढ़िया भाखा कौनो संग” जैसे गीतों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। राऊत, ददरिया, पंथी, होली और विवाह गीतों की प्रस्तुति से उन्होंने छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू हर दिल में बसा दी।
इसके बाद मंच संभाला ‘चिन्हारी – द गर्ल बैंड’ ने। जयश्री नायर और मेघा ताम्रकार के नेतृत्व में इस बैंड ने लोकधुनों और आधुनिक संगीत के मेल से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि परंपरा और नवाचार का संगम ही नई पीढ़ी की पहचान है।
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण रहे बॉलीवुड के लोकप्रिय पार्श्वगायक आदित्य नारायण, जिन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीतों की प्रस्तुति दी। “पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा”, “पहला नशा पहला खुमार”, “बिन तेरे सनम”, “केसरिया इश्क है तेरा”, “मैं निकला गड्डी लेके” जैसे गीतों पर पूरा जनसमूह झूम उठा। आदित्य नारायण की ऊर्जावान प्रस्तुति और संवाद शैली ने माहौल को उल्लासमय बना दिया।
कार्यक्रम के समापन में पद्मश्री डोमार सिंह कंवर की पारंपरिक नाचा प्रस्तुति ने दर्शकों को लोककला की गहराई से जोड़ा। उनके अभिनय, संवाद और हावभाव ने मंच को ऊर्जा और हास्य से भर दिया।
राज्योत्सव की यह सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और आधुनिक संगीत का जीवंत संगम बनी — जहां परंपरा और आधुनिकता ने एक साथ मिलकर राज्य के गौरव और रचनात्मकता की नई कहानी लिख दी।



