यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रीति माझी का ‘लाल सलाम’ पोस्ट पर बवाल, नक्सली हिड़मा के समर्थन ने खड़ा किया नया विवाद

रायपुर। देश के सबसे खूंखार और वांछित माओवादी कमांडर माड़वी हिड़मा को आंध्र प्रदेश की ग्रेहाउंड्स पुलिस ने तीन दिन पहले अल्लूरी सीताराम राजू जिले के जंगलों में मुठभेड़ में मार गिराया। हिड़मा के साथ उसकी पत्नी राजे हिड़मा सहित चार अन्य नक्सली भी ढेर हुए। सैकड़ों जवानों और आम नागरिकों के हत्यारे हिड़मा की मौत से पूरे देश में राहत और जश्न का माहौल है।
लेकिन इसी बीच युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रीति माझी द्वारा हिड़मा की मौत पर सोशल मीडिया में ‘लाल सलाम कामरेड हिड़मा’ लिखकर पोस्ट करने से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने हिड़मा की एक तस्वीर भी साझा की, जिसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या कांग्रेस के कुछ नेताओं में नक्सलवाद के प्रति ‘हमदर्दी’ है?
🔴 कांग्रेस की सफाई – “यह व्यक्तिगत विचार”
प्रीति माझी के इस पोस्ट ने प्रदेश कांग्रेस को असहज स्थिति में ला दिया है। पार्टी ने इसे उनका व्यक्तिगत विचार बताते हुए दूरी बनाई है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा—
“कांग्रेस और देश की नजर में हिड़मा एक हत्यारा था। झीरम कांड का मास्टरमाइंड हिड़मा था। उससे किसी भी प्रकार की संवेदना का सवाल ही नहीं उठता। किसी ने पोस्ट किया है तो वह उस व्यक्ति का निजी विचार हो सकता है।”
हालांकि, अभी तक कांग्रेस ने प्रीति माझी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है।
🔴 कौन था माड़वी हिड़मा?
- जन्म: 1981, पुवर्ती गाँव, सुकमा (छत्तीसगढ़)
- पद: पीएलजीए बटालियन नंबर-1 का प्रमुख, CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे युवा सदस्य
- हिड़मा पर कुल ₹1.50 करोड़ से अधिक का इनाम घोषित था
- बस्तर से केंद्रीय समिति में शामिल होने वाला इकलौती आदिवासी सदस्य
- माओवादी संगठन की सबसे घातक स्ट्राइक यूनिट का नेतृत्व करता था
🔴 हिड़मा के बड़े हमले — खूनी इतिहास
हिड़मा कम से कम 26 बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा:
- 2007 – एर्राबोर राहत शिविर हमला: 33 ग्रामीण मारे गए
- 2007 – मेटागुड़ा IED ब्लास्ट: 8 जवान शहीद
- 2010 – ताड़मेटला हमला: 76 जवान शहीद
- 2013 – झीरम घाटी नरसंहार: 27 कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता मारे गए
- 2017 – बरसापाल हमला: 25 जवान शहीद
- 2021 – टेकलगुड़ा मुठभेड़: 22 जवान शहीद
- 2024 – धरमावरम कैंप हमला
हिड़मा की मौत को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ी कामयाबी मान रही हैं।
🔴 बढ़ता विवाद, कठिन सवाल
प्रीति माझी के ‘लाल सलाम’ पोस्ट के बाद अब चार बड़े सवाल उठ रहे हैं—
- क्या कांग्रेस के कुछ नेताओं में नक्सलवाद के प्रति नरमी है?
- झीरम घाटी जैसे दर्दनाक हमले को क्या भूल चुकी है पार्टी?
- हिड़मा जैसे खूंखार नक्सली के समर्थन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- क्या यह कांग्रेस की आंतरिक मतभिन्नता का संकेत है?
फिलहाल मामला सोशल मीडिया पर तेजी से तूल पकड़ रहा है और राजनीतिक बयानबाज़ी जारी है।



