
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर 2025 दशहरा पर्व पर श्रीराम की उपासना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रीराम की पूजा और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
विद्वानों का कहना है कि ‘‘राम रक्षा स्तोत्र’’ का नियमित पाठ करने से न केवल शत्रु भय का नाश होता है, बल्कि मानसिक शांति, धैर्य और पराक्रम भी प्राप्त होता है।
क्या है राम रक्षा स्तोत्र?
राम रक्षा स्तोत्र महर्षि बुधकौशिक द्वारा रचित माना जाता है। मान्यता है कि स्वयं भगवान शंकर ने इसे महर्षि को स्वप्न में सुनाया था। इस स्तोत्र का पाठ करने से प्रभु श्रीराम भक्त की रक्षा करते हैं।
राम रक्षा स्तोत्रम् (पूर्ण पाठ)
श्रीगणेशाय नमः ॥
अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषिः ।
श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप् छन्दः ।
सीता शक्ति: । श्रीमद्हनुमान् कीलकम् ।
श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥
ध्यानम्
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं ।
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ॥
वामाङ्कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीराजन्तं ।
जानकीलक्षणीशं रघुवरममलं सर्वलोकैकवन्द्यम् ॥
स्तोत्रम्
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातुं आविर्भूतमजं विभुम् ॥
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥
कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित् ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥
सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत् ॥
जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥
पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः ।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥
रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन् ।
नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥
जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
यः कण्ठे धारयेत्सोऽपि यत्र यत्र प्रवर्तते ॥
तत्र तत्रार्थलाभश्च विजयश्च पराजयः ।
जयं लभेत्सदा राममंश्चरेत्सत्रवञ्जयः ॥
राम रक्षा स्तोत्र का महत्व
🔹 पाठ करने से शत्रु भय समाप्त होता है।
🔹 कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सफलता मिलती है।
🔹 धन, यश और आयु की वृद्धि होती है।
🔹 जीवन में हर प्रकार की बाधा और संकट दूर होते हैं।
👉 दशहरे के अवसर पर राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना विशेष शुभ माना गया है। विद्वानों का मत है कि इस स्तोत्र का पाठ करने वाले को जीवनभर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद मिलता है।



