58% आरक्षण पर फिर विवाद: हाईकोर्ट में अवमानना याचिका, सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक सुनवाई टली

बिलासपुर, 09 दिसंबर 2025/ छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था जारी रखने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर विवाद एक बार फिर बढ़ गया है। प्रभावित अभ्यर्थियों के एक समूह ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में दो अलग-अलग आरक्षण रोस्टर लागू होने से राज्य स्तरीय भर्तियों में पदों की संख्या पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है और उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि वर्तमान स्थिति अभ्यर्थियों को असमंजस में डाल रही है, क्योंकि 58% आरक्षण को हाईकोर्ट पहले ही 19 सितंबर 2022 को असंवैधानिक करार दे चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार भर्तियों में इसे लागू कर रही है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और राज्य सरकार को 58% आरक्षण जारी रखने के लिए शीर्ष अदालत से कोई स्थगन आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। अमीन पटवारी, एडीईओ और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में 58% आरक्षण लागू करने के खिलाफ यह अवमानना याचिका दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सरकार द्वारा 58% आरक्षण जारी रखना उसके पूर्व आदेश की अवमानना प्रतीत होता है। हालांकि, चूंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद इस याचिका पर आगे सुनवाई करने की बात कही है।
अभ्यर्थियों को यह राहत मिली है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट इस अवमानना याचिका पर निर्णायक सुनवाई करेगा।



