
रायपुर, 17 जनवरी 2026
राजधानी रायपुर में लापरवाही एक बार फिर मासूम की जान ले गई। मोवा थाना क्षेत्र में सेप्टिक टैंक साफ कराने के लिए एक सप्ताह पहले खोदा गया गड्ढा खुला छोड़ दिया गया था। इसी गड्ढे में गिरकर 4 साल की बच्ची की मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक बच्ची घर के पास खेल रही थी, तभी संतुलन बिगड़ने से वह खुले गड्ढे में जा गिरी। गंभीर हालत में उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही मोवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची, पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
2025 में दो हादसे, तीन बच्चों की मौत
यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2025 में रायपुर में खुले गड्ढों में गिरने से दो अलग-अलग घटनाओं में तीन बच्चों की जान जा चुकी है।
11 नवंबर 2025:
रायपुर के एक सरकारी स्कूल के पास सड़क किनारे पानी से भरे गड्ढे में गिरकर दो मौसेरे भाइयों—सत्यम (8) और आलोक (7)—की डूबने से मौत हो गई थी। यह गड्ढा फॉर्च्यून डेवलपर्स द्वारा खुदवाया गया था, जिसे भरा नहीं गया। घटना के 48 घंटे बाद तक भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
13 अप्रैल 2025:
ईडब्ल्यूएस कॉलोनी, गुलमोहर पार्क (रामनगर) में नगर निगम द्वारा खोदे गए गड्ढे में तीन बच्चे गिर गए थे। स्थानीय लोगों की मदद से दो बच्चों को बचा लिया गया, लेकिन एक बच्चे की मौत हो गई थी।
एक दिन पहले भी हुआ था हादसा
12 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ नगर स्थित शीतला मंदिर के पास निगम द्वारा खोदे गए खुले गड्ढे में 3 साल का बच्चा गिर गया था। संयोगवश वहां से गुजर रहे एक बाइक सवार ने समय रहते गड्ढे में कूदकर बच्चे की जान बचा ली। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार
लगातार हो रही इन घटनाओं ने नगर निगम, बिल्डरों और मकान मालिकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले गड्ढों को बिना सुरक्षा उपायों के छोड़ देना बच्चों के लिए मौत का जाल बनता जा रहा है। इसके बावजूद न तो निगरानी सख्त हो रही है और न ही जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई दिखाई दे रही है।
शहर में बढ़ती ऐसी घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह किसी परिवार की खुशियां छीन सकती है।



