आत्मनिर्भरता की मिसाल: बालोद का औराटोला बना पहला ‘लखपति दीदी ग्राम’, 65 परिवारों ने पार की लाख की आय

रायपुर, 08 अप्रैल 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपए या उससे अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।
बालोद जिले में अब तक 20,982 ‘लखपति दीदी’ बनाई जा चुकी हैं। इसी कड़ी में ‘लखपति ग्राम’ की अवधारणा को भी विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य हर परिवार को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में यह कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

💡 लखपति ग्राम की खास बातें
- हर परिवार की कम से कम 1 लाख वार्षिक आय सुनिश्चित करना
- एक से अधिक आय स्रोत अपनाने पर जोर
- उन्नत कृषि, पशुपालन, मशरूम, सिलाई, छोटे उद्योग को बढ़ावा
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण
💰 वित्तीय सहयोग और बाजार व्यवस्था
- 4054 स्व-सहायता समूहों को 114 करोड़ रुपए ऋण
- 801 समूहों को 10 करोड़ रुपए वित्तीय सहायता
- उत्पादों की बिक्री सरस मेला, स्थानीय बाजार और सरकारी कार्यालयों में
👩🌾 औराटोला बना पहला ‘लखपति ग्राम’
बालोद जिले के डौंडी विकासखंड का औराटोला अब जिले का पहला ‘लखपति ग्राम’ बन गया है।
यहाँ 65 परिवार, 6 स्व-सहायता समूहों के सदस्य लखपति दीदी बन चुके हैं।

🌟 सफलता की प्रेरक कहानियां
👉 कुमेश्वरी मसिया
- मत्स्य पालन + सब्जी उत्पादन
- सालाना आय: ₹1.17 लाख
👉 लाकेश्वरी (अटल महिला समूह)
- फाइल पैड यूनिट शुरू
- हर सदस्य की मासिक आय: ₹7-8 हजार
👉 लोकेश्वरी साहू
- डेयरी + मशरूम + सिलाई कार्य
- सालाना आय: ₹2.60 लाख+
📊 प्रशासन की भूमिका
जिला पंचायत सीईओ सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि
- लक्ष्य: 26 हजार लखपति दीदी
- अब तक: 20,982 हासिल
- शेष लक्ष्य जल्द पूरा होगा
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन में
माइक्रो लेवल प्लानिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है।
🚀 क्या बनाता है औराटोला को खास?
- महिलाओं का नेतृत्व
- बहुआयामी आजीविका मॉडल
- सरकारी योजनाओं का सही उपयोग
- कौशल विकास पर फोकस
🏆 रोल मॉडल बना गांव
औराटोला अब पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है।
अन्य गांवों की महिलाएं यहां आकर मॉडल सीख रही हैं और इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।



