हिंसा छोड़ नई राह पर लौटे कदम: आत्मसमर्पित माओवादियों को मिली नौकरी, कांकेर बना मिसाल

रायपुर, 02 अप्रैल 2026।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार साफ दिखने लगी है। हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित माओवादी अब सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उत्तर बस्तर कांकेर जिला इस दिशा में एक नई मिसाल बनकर उभरा है, जहां प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला यह प्रदेश का पहला जिला बन गया है।
जिला प्रशासन की पहल पर आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल पीड़ितों को पहले विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया गया और अब उन्हें रोजगार भी दिया जा रहा है। भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) स्थित कैम्प में उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने कलेक्टर कक्ष में 4 आत्मसमर्पित माओवादियों और पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें सगनूराम आंचला, रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। सभी को निजी फर्म में नौकरी मिली है, जहां उन्हें 15 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय के साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
पुनर्वासित सगनूराम आंचला ने बताया कि गलत संगति और जानकारी के अभाव में वे माओवादी संगठन से जुड़ गए थे, लेकिन अब मुख्यधारा में लौटकर जीवन का वास्तविक महत्व समझ में आया है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें जीने का सही मकसद मिल गया है।
वहीं बीरसिंह मंडावी ने बताया कि मुल्ला कैम्प में उन्हें नया जीवन मिला, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण ने उन्हें कुशल बनाया। उन्होंने शासन की पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि अब वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सम्मानपूर्वक जीवन जीना चाहते हैं।
जिला प्रशासन की इस पहल से न केवल पुनर्वासितों को नई दिशा मिल रही है, बल्कि यह अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर सामने आया है।



