छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक वार: लोकसभा में गूंजा जवानों का शौर्य, ‘रेड कॉरिडोर’ बना ‘ग्रोथ कॉरिडो

रायपुर/दिल्ली, 30 मार्च 2026/ लोकसभा में सोमवार को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) के खात्मे को लेकर अहम चर्चा हुई। यह चर्चा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च की समयसीमा से ठीक एक दिन पहले हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ में हुए बदलाव और सुरक्षा बलों की भूमिका को प्रमुखता से रखा गया।
राजनांदगांव से भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने सदन में कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को “सर्जिकल तरीके” से खत्म करने की दिशा में निर्णायक काम हुआ है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब राज्य में हिंसा अपने चरम पर थी, लेकिन अब हालात में व्यापक सुधार आया है और इसका श्रेय सुरक्षा बलों की रणनीति और सरकार की नीतियों को जाता है।
उन्होंने वर्ष 2010 की उस घटना का जिक्र किया, जब 76 जवान शहीद हुए थे। पांडेय ने कहा कि उस दौर में देश के भीतर ही इस तरह की घटनाओं पर प्रतिक्रिया ने चिंता बढ़ाई थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
बस्तर बना विकास मॉडल
संतोष पांडेय ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार ने बस्तर क्षेत्र में विकास का नया मॉडल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि 12 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है और विकास को गति मिली है।
कांग्रेस पर तीखा हमला
पुरी (ओडिशा) से सांसद संबित पात्रा ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि देश ने “रेड कॉरिडोर” से “ग्रोथ कॉरिडोर” तक का सफर तय किया है, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों के कारण नक्सलवाद लंबे समय तक बना रहा।
पात्रा ने लेखिका अरुंधति रॉय के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें नक्सलियों को “गांधियंस विद गन” बताया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीति नक्सलवाद पर “दोहरे मापदंड” वाली रही और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अर्बन नक्सल पर भी उठे सवाल
संबित पात्रा ने नवंबर 2013 में तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को “अर्बन नक्सल” की जानकारी थी, लेकिन उस पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) में ऐसे तत्वों की मौजूदगी थी।
सुरक्षा बलों की भूमिका अहम
सदन में कई वक्ताओं ने सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी बहादुरी, रणनीति और लगातार ऑपरेशन के कारण ही नक्सलवाद पर काबू पाया जा सका। जवानों के समर्पण और बलिदान को देश के लिए प्रेरणादायक बताया गया।
निष्कर्ष
लोकसभा में हुई इस चर्चा ने साफ किया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं रही, बल्कि विकास, बुनियादी ढांचे और जनसहभागिता के जरिए व्यापक बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज रहे।



