3 साल की उम्र में शुरू किया तबला, 20s में मचा दी धूम—भारत में डिस्को की नींव रखने वाले ‘डिस्को किंग’ बप्पी लहरी की अनसुनी कहानी

नई दिल्ली। जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाते, उस उम्र में महज तीन साल का एक बच्चा तबला सीख रहा था। संगीत उसके खून में था—क्योंकि माता-पिता खुद भी मशहूर गायक थे। यही बच्चा आगे चलकर भारतीय संगीत जगत का ‘डिस्को किंग’ बना। हम बात कर रहे हैं अलोकेश अपरेश लहरी उर्फ बप्पी लहरी की, जिन्होंने भारत में डिस्को म्यूजिक को नई पहचान दी।
बचपन से ही संगीत का जुनून
बप्पी लहरी का जन्म एक संगीत परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे, जिसका असर उन पर बचपन से ही दिखने लगा। कहा जाता है कि महान गायिका लता मंगेशकर की सलाह पर उन्हें प्रसिद्ध तबला वादक समता प्रसाद के पास तालीम के लिए भेजा गया।
रिश्ते में वे दिग्गज गायक किशोर कुमार के भांजे थे। 19 साल की उम्र में उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
70-80 के दशक में लाए डिस्को की आंधी
70 के दशक के आखिर में जब हिंदी सिनेमा पारंपरिक धुनों में बंधा था, तब बप्पी लहरी ने डिस्को की नई लहर पैदा की। 80 और 90 के दशक में उनके गाने हर पार्टी और हर स्टेज शो की जान बन गए।
साल 1982 में आई फिल्म डिस्को डांसर का गाना ‘आई एम अ डिस्को डांसर’ न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी सुपरहिट हुआ। इस गाने ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और वे सचमुच ‘डिस्को किंग’ कहलाने लगे।
1 साल में 180 गाने, गिनीज में नाम दर्ज
बप्पी लहरी सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि जबरदस्त संगीतकार भी थे। 80 के दशक में उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ काम किया। साल 1986 में उन्होंने 33 फिल्मों के लिए करीब 180 गानों की रिकॉर्डिंग की। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।
उनकी पर्सनैलिटी जितनी चमकदार थी—सोने के गहनों से लदी हुई—उनका करियर भी उतना ही दमकता रहा। उन्होंने हजारों गानों को अपनी आवाज दी और सैकड़ों फिल्मों में संगीत दिया।
पॉप और फिल्म म्यूजिक में रचा इतिहास
बप्पी लहरी ने इंडियन पॉप म्यूजिक को नई दिशा दी। डिस्को बीट्स, सिंथेसाइज़र और वेस्टर्न टच को हिंदी गानों में पिरोकर उन्होंने एक नया ट्रेंड शुरू किया। आज भी उनके गाने पार्टियों और रेट्रो नाइट्स की शान माने जाते हैं।
संगीत की दुनिया में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा—एक ऐसा कलाकार जिसने बचपन से शुरू किया सफर और भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री पर दशकों तक राज किया।
3 साल की उम्र में शुरू किया तबला, 20s में मचा दी धूम—भारत में डिस्को की नींव रखने वाले ‘डिस्को किंग’ बप्पी लहरी की अनसुनी कहानी
नई दिल्ली। जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाते, उस उम्र में महज तीन साल का एक बच्चा तबला सीख रहा था। संगीत उसके खून में था—क्योंकि माता-पिता खुद भी मशहूर गायक थे। यही बच्चा आगे चलकर भारतीय संगीत जगत का ‘डिस्को किंग’ बना। हम बात कर रहे हैं अलोकेश अपरेश लहरी उर्फ बप्पी लहरी की, जिन्होंने भारत में डिस्को म्यूजिक को नई पहचान दी।
बचपन से ही संगीत का जुनून
बप्पी लहरी का जन्म एक संगीत परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे, जिसका असर उन पर बचपन से ही दिखने लगा। कहा जाता है कि महान गायिका लता मंगेशकर की सलाह पर उन्हें प्रसिद्ध तबला वादक समता प्रसाद के पास तालीम के लिए भेजा गया।
रिश्ते में वे दिग्गज गायक किशोर कुमार के भांजे थे। 19 साल की उम्र में उन्होंने म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
70-80 के दशक में लाए डिस्को की आंधी
70 के दशक के आखिर में जब हिंदी सिनेमा पारंपरिक धुनों में बंधा था, तब बप्पी लहरी ने डिस्को की नई लहर पैदा की। 80 और 90 के दशक में उनके गाने हर पार्टी और हर स्टेज शो की जान बन गए।
साल 1982 में आई फिल्म डिस्को डांसर का गाना ‘आई एम अ डिस्को डांसर’ न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी सुपरहिट हुआ। इस गाने ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और वे सचमुच ‘डिस्को किंग’ कहलाने लगे।
1 साल में 180 गाने, गिनीज में नाम दर्ज
बप्पी लहरी सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि जबरदस्त संगीतकार भी थे। 80 के दशक में उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ काम किया। साल 1986 में उन्होंने 33 फिल्मों के लिए करीब 180 गानों की रिकॉर्डिंग की। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।
उनकी पर्सनैलिटी जितनी चमकदार थी—सोने के गहनों से लदी हुई—उनका करियर भी उतना ही दमकता रहा। उन्होंने हजारों गानों को अपनी आवाज दी और सैकड़ों फिल्मों में संगीत दिया।
पॉप और फिल्म म्यूजिक में रचा इतिहास
बप्पी लहरी ने इंडियन पॉप म्यूजिक को नई दिशा दी। डिस्को बीट्स, सिंथेसाइज़र और वेस्टर्न टच को हिंदी गानों में पिरोकर उन्होंने एक नया ट्रेंड शुरू किया। आज भी उनके गाने पार्टियों और रेट्रो नाइट्स की शान माने जाते हैं।
संगीत की दुनिया में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा—एक ऐसा कलाकार जिसने बचपन से शुरू किया सफर और भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री पर दशकों तक राज किया।



