
रायपुर/भिलाई, 06 फ़रवरी 2026/ छत्तीसगढ़ में उन्नत हृदय-चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। प्रदेश में पहली बार वाल्व-इन-वाल्व ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया के माध्यम से 68 वर्षीय मरीज को नया जीवन मिला है। यह जटिल प्रक्रिया रायपुर स्थित एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, लालपुर में सफलतापूर्वक की गई।
मरीज को करीब 12 वर्ष पूर्व लगाए गए बायोप्रोस्थेटिक एओर्टिक वाल्व के क्षय के कारण सांस फूलने और शारीरिक क्षमता में लगातार गिरावट की शिकायत थी। उम्र अधिक होने के कारण दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी का जोखिम ज्यादा था, ऐसे में डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव, कैथेटर-आधारित उपचार को प्राथमिकता दी।
बिना छाती खोले बदला गया हार्ट वाल्व
यह अत्याधुनिक प्रक्रिया फेमोरल आर्टरी के माध्यम से की गई, जिसमें पुराने क्षतिग्रस्त सर्जिकल वाल्व के भीतर नया ट्रांसकैथेटर वाल्व सटीक रूप से स्थापित किया गया। इससे मरीज को दोबारा छाती की सर्जरी से बचाया जा सका।
इस प्रक्रिया को कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने अंजाम दिया, जिसका नेतृत्व
डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी (क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट) ने किया।
टीम में डॉ. सुनील गौनियाल और डॉ. स्नेहिल गोस्वामी शामिल रहे।
पूरी प्रक्रिया डॉ. एस. के. जेना (प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी, KIMS) के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।
उन्नत CT इमेजिंग से मिली सटीक योजना
डॉक्टरों के अनुसार, CT-आधारित एडवांस इमेजिंग और सही वाल्व साइजिंग इस सफलता की सबसे अहम कड़ी रही। 26 जनवरी 2026 को की गई प्रक्रिया के बाद वाल्व का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा—
- दबाव अंतर न्यूनतम
- पैरावाल्वुलर लीक नहीं
- स्ट्रोक, ब्लीडिंग या पेसमेकर की आवश्यकता नहीं पड़ी
मरीज की रिकवरी तेज़ रही और कुछ ही समय में लक्षणों में स्पष्ट सुधार देखा गया।
एनेस्थीसिया टीम का भी अहम योगदान
इस जटिल प्रक्रिया में डॉ. राकेश राजकुमार चंद और डॉ. स्नेहा (सीनियर कंसल्टेंट, एनेस्थीसियोलॉजी) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
बुजुर्ग मरीजों के लिए गेम-चेंजर तकनीक
डॉ. जैन के अनुसार,
“वाल्व-इन-वाल्व TAVI उन बुजुर्ग मरीजों के लिए परिवर्तनकारी विकल्प है, जिनके सर्जिकल वाल्व विफल हो चुके हैं। यह तकनीक तेज़ रिकवरी और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।”
छत्तीसगढ़ में उन्नत हार्ट केयर की नई पहचान
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेलमकोण्डा ने कार्डियोलॉजी टीम को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रक्रियाएं कैथेटर-आधारित वाल्व थैरेपी को प्रदेश में नई दिशा दे रही हैं और उन मरीजों के लिए आशा बन रही हैं जिन्हें पहले सर्जरी के लिए अनुपयुक्त माना जाता था।



