बस्तर अब ‘आकांक्षी जिला’ नहीं, बल्कि देश में ‘बस्तर ओलंपिक’ और विकास का प्रतीक बन चुका है: प्रधानमंत्री मोदी ने की तारीफ, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया दशकों की उपेक्षा को बदलने का सफर

रायपुर, 5 फरवरी 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में अपने उद्बोधन के दौरान विशेष रूप से बस्तर का जिक्र करते हुए कहा कि जो क्षेत्र कभी “आकांक्षी जिला” माना जाता था, वह आज पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा है। उन्होंने बताया कि विकास की लहर अब बस्तर के हर गांव तक पहुंच रही है। कई ऐसे गांव हैं जहां पहली बार बस सेवा शुरू हुई और पूरे गांव ने इसे उत्सव की तरह मनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले पिछड़े जिलों को छोड़ दिया जाता था और वहां के करोड़ों लोगों की मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं होती थीं, लेकिन अब नीति और दृढ़ संकल्प के दम पर यह सोच बदल दी गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधनों में समृद्ध है। यहां कुटुमसर जैसी विश्वविख्यात गुफा, विशाल अबूझमाड़ का जंगल और धुड़मारास जैसे विश्व स्तर के पर्यटन गांव मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण विकास नहीं हो पाया था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के साहस के कारण बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और विकास ने नई गति पकड़ ली है। इसी विश्वास और उत्साह का परिणाम है कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन पिछले वर्ष से किया जा रहा है। पिछले वर्ष इसमें 1.65 करोड़ युवाओं ने भाग लिया, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3.91 करोड़ तक पहुंच गई है।
उन्होंने आगे बताया कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बस्तर और बस्तर ओलंपिक का उल्लेख छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन रहा है। यह साबित करता है कि नीति, नीयत और नेतृत्व सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।



