भाषा, साहित्य और संस्कृति को मिलेगी नई दिशा: दशकों के सामाजिक-साहित्यिक अनुभव वाले प्रभात मिश्रा को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की कमान, शासन ने की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग ने राज्य की भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रभात मिश्रा को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस संबंध में मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से 5 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया गया। नियुक्ति उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगी।
जारी आदेश के अनुसार, प्रभात मिश्रा, निवासी टिकरापारा, नंदी चौक (पुराने पोस्ट ऑफिस के सामने), रायपुर को यह दायित्व अस्थायी रूप से सौंपा गया है। आदेश राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार संस्कृति विभाग की अवर सचिव रूचि शर्मा द्वारा जारी किया गया।
प्रभात मिश्रा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर को समृद्ध करने वाले एक सक्रिय स्तंभ के रूप में जाने जाते हैं। वे वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, पर्यावरणविद् और समाजसेवी के रूप में विख्यात हैं। समाजशास्त्र और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त मिश्रा ने जनसंचार माध्यमों के जरिए सामाजिक सरोकारों को मुखर रूप से सामने रखा है। उन्होंने आकाशवाणी, दूरदर्शन और कई राष्ट्रीय चैनलों पर कार्य करते हुए जनजागरण का महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। ‘घर संसार’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने भूगर्भ जल संरक्षण जैसे विषयों को आमजन तक पहुँचाया।
साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। ‘महासागर’, ‘दुधाधारी प्रकाश’ सहित कई पुस्तकों के लेखक मिश्रा ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और इतिहास को शब्दों में संजोया है। उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ राजभाषा स्मारिका’ और राष्ट्रीय पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ का संपादन किया है। ‘सावरकर सौरभ’ और ‘छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक विकास’ जैसे ग्रंथों के संपादन के जरिए उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को वैचारिक मजबूती प्रदान की।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रभात मिश्रा का योगदान बहुआयामी रहा है। ‘वॉटर वारियर’ के रूप में उन्होंने व्यक्तिगत जल सत्याग्रह अभियान चलाया, खारून नदी के तट पर वृक्षारोपण का नेतृत्व किया और नदी यात्रा के माध्यम से जलाशयों के संरक्षण को लेकर जनजागरूकता फैलाई। नरहरेश्वर सरोवर में गंदे पानी के प्रवेश को रोकने और भगवान बालाजी ट्रस्ट की भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए उन्होंने उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएँ दायर कीं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
उन्होंने ग्राम विकास शोध समाधान केंद्र की स्थापना कर किसानों के बच्चों के लिए पुस्तकालय का संचालन किया और जैविक खेती को बढ़ावा दिया। सामाजिक, साहित्यिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में उनके दशकों लंबे समर्पित कार्यों के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति को राज्य में हिंदी और छत्तीसगढ़ी सहित राजभाषा के विकास, प्रचार-प्रसार और सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में आयोग भाषा, संस्कृति और जनचेतना के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल करेगा।



