आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ बस्तर पण्डुम 2026: 54 हजार से ज्यादा कलाकारों का रजिस्ट्रेशन, 7 से 9 फरवरी तक संभाग स्तरीय आयोजन

रायपुर | 5 फरवरी 2026
बस्तर की माटी की खुशबू और समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी पहचान दर्ज कराने को तैयार है। बस्तर क्षेत्र का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव बस्तर पण्डुम 2026 इस वर्ष नए कीर्तिमान के साथ आयोजित हो रहा है। इस बार 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों के पंजीयन ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है।
बस्तर पण्डुम सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवनशैली का जीवंत उत्सव है। इसमें पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत (मांदर-बांसुरी), नाटक, वेशभूषा, लोक शिल्प और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम कर रहा है।
1 साल में तीन गुना बढ़ी भागीदारी, 54,745 तक पहुंचा आंकड़ा
वर्ष 2025 में विकासखंड स्तर पर जहां 15,596 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 54,745 पहुंच गई है। यह आंकड़ा बस्तरवासियों की अपनी संस्कृति के प्रति बढ़ती जागरूकता और उत्साह को दर्शाता है।
जिलावार भागीदारी में दंतेवाड़ा जिला 24,267 पंजीयन के साथ सबसे आगे रहा है। इसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जिलों से भी हजारों कलाकारों ने भागीदारी दर्ज कराई है।
7 से 9 फरवरी तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं
संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम का आयोजन 7 से 9 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। जिला स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद चयनित 84 दलों के 705 कलाकार इन तीन दिनों में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
इन दिनों जनजातीय नृत्यों की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगा।
12 विधाओं में होगा प्रदर्शन, नृत्य और नाटक में सबसे ज्यादा कलाकार
प्रतियोगिता में कुल 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
- जनजातीय नृत्य: 192 कलाकार
- जनजातीय नाटक: 134 कलाकार
- पारंपरिक वाद्ययंत्र: 65 कलाकार
- जनजातीय व्यंजन: 56 प्रतिभागी
इसके साथ ही वन औषधियों, चित्रकला, शिल्पकला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
705 में 340 महिलाएं, मातृशक्ति की मजबूत भागीदारी
इस आयोजन की खास बात महिलाओं की सशक्त भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुंचे 705 कलाकारों में 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह संतुलन बताता है कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में महिलाएं भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता, रिकॉर्ड भागीदारी और सांस्कृतिक विविधता के साथ बस्तर की पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर मजबूती देने की ओर अग्रसर है।



