दावोस से वॉशिंगटन तक बदला ट्रंप का रुख: ग्रीनलैंड विवाद पर नरमी, यूरोप पर टैरिफ की धमकी पूरी तरह वापस

डिजिटल डेस्क, दावोस/वाशिंगटन।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनाए गए आक्रामक रुख से बड़ा यू-टर्न लेते हुए यूरोपीय सहयोगी देशों पर लगाए जाने वाले टैरिफ की धमकी पूरी तरह वापस ले ली है। दावोस में नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भविष्य के समझौते का एक “फ्रेमवर्क” तैयार हो गया है।
उन्होंने साफ किया कि इसी समझ के आधार पर 1 फरवरी से लागू होने वाली 10% टैरिफ (जिसे बाद में 25% तक बढ़ाने की योजना थी) अब नहीं लगाई जाएगी।
ट्रंप ने लिखा— यदि यह समझौता अमल में आता है, तो यह अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस शील्ड “गोल्डन डोम” को लेकर अतिरिक्त चर्चाएं जारी हैं, जिनका संबंध ग्रीनलैंड से भी है।
इस पूरे मामले में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। ये सभी अधिकारी सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करेंगे।
दरअसल, बीते दिनों ट्रंप ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स जैसे आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। वजह यह थी कि इन देशों ने ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने या बेचने के प्रस्ताव का विरोध किया था।
ग्रीनलैंड में यूरोपीय देशों की सैन्य गतिविधियों को ट्रंप ने सीधी चुनौती माना था, जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई और ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में तनाव गहरा गया।
हालांकि, दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे के साथ हुई बैठक के बाद हालात बदले।
नाटो की ओर से प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने बैठक को “उत्पादक” बताया।
नाटो के मुताबिक, तैयार किया गया फ्रेमवर्क आर्कटिक सुरक्षा पर केंद्रित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य रूस और चीन को आर्कटिक क्षेत्र में आर्थिक या सैन्य रूप से पैर जमाने से रोकना है।
अब डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ आगे की बातचीत की जाएगी।



