बीजापुर में बुलडोजर कार्रवाई: DRG जवान का घर भी टूटा, महिलाओं का सवाल—अब कहां जाएंगे?

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में न्यू बस स्टैंड के पीछे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। प्रशासन की कार्रवाई में अब तक 20 अवैध मकान ढहाए जा चुके हैं, जबकि कुल 75 मकानों को तोड़े जाने की तैयारी है। इस दौरान डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के एक जवान का घर भी बुलडोजर की जद में आ गया, जबकि जवान नाइट ड्यूटी पर था।
कार्रवाई के वक्त मौके पर नगरपालिका, तहसीलदार और भारी पुलिस बल मौजूद रहा। कई जगहों पर महिलाओं को खींच-खींचकर घरों से बाहर निकालने के आरोप लगे हैं। रोती-बिलखती महिलाओं की तस्वीरें सामने आई हैं, जो पूछ रही थीं—“हम कहां जाएंगे?”
DRG जवान की पत्नी का दर्द
DRG जवान की पत्नी ने बताया कि वे 2006 से यहीं रह रहे हैं और गांव में उनका कोई घर नहीं है। पति ड्यूटी पर गए हुए हैं, इसी बीच घर तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा, “अब हमारे पास जाने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा।”
नक्सली हिंसा से भागकर बसे थे लोग
पीड़ित गंगा माड़वी का कहना है कि वे नक्सली हिंसा के कारण गांव छोड़कर शहर आए थे और पिछले चार साल से यहीं रह रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रशासन से बातचीत के बाद उन्होंने सरकारी जमीन पर घर बनाया, नियमित टैक्स भी जमा किया, फिर भी मकान तोड़ दिया गया।
गंगा ने बताया कि तीन महीने पहले नोटिस मिला था, जिस पर मामला कोर्ट में चल रहा है। उन्हें यह भरोसा भी दिलाया गया था कि घर नहीं तोड़ा जाएगा, लेकिन अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई। उनका कहना है, “गांव लौटे तो नक्सली मार देंगे।”
विरोध और मोहलत की मांग
कार्रवाई के दौरान लोगों ने विरोध किया और कम से कम दो दिन की मोहलत मांगी ताकि जरूरी सामान निकाल सकें, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और मुनादी के बुलडोजर चला दिए गए।
प्रशासन का पक्ष
मुख्य नगरपालिका अधिकारी बी.एल. नुरेटी और तहसीलदार पंचराम सलामे का कहना है कि दो बार नोटिस दिए जा चुके थे। अतिक्रमण नहीं हटाने पर मजबूरी में कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई कुल 75 अवैध मकानों पर की जा रही है।
सवाल बरकरार
एक तरफ प्रशासन नियमों का हवाला दे रहा है, तो दूसरी ओर नक्सल प्रभावित परिवारों, महिलाओं और बच्चों के सामने पुनर्वास और सुरक्षा का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्या बेघर हुए परिवारों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होगी—इस पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।



