
नई दिल्ली | बड़ी खबर
श्रीहरिकोटा से भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार सुबह 10:18 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62/ईओएस-एन1 मिशन का सफल प्रक्षेपण किया। इस मिशन के तहत DRDO द्वारा विकसित अत्यंत गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा’ समेत कुल 15 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया।
यह PSLV का 64वां मिशन है। रॉकेट EOS-N1 और सह-उपग्रहों को सूर्य तुल्यकालिक कक्षा (SSO) में स्थापित करने के लिए प्रक्षेपित किया गया। मिशन की एक खास बात यह भी रही कि इसमें भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
हालांकि, मिशन के दौरान PS3 (स्टेज-3) के अंतिम चरण में तकनीकी गड़बड़ी की खबर सामने आई है। स्टेज-3 को घूमते हुए देखा गया, जिसके बाद ISRO ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इससे पहले की एक लॉन्चिंग में भी इसी स्टेज से जुड़ी समस्या सामने आई थी। फिलहाल मिशन के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।
रक्षा क्षमताओं को बड़ी बढ़त
‘अन्वेषा’ उपग्रह उच्च-रिजॉल्यूशन इमेजिंग और दुश्मन ठिकानों के सटीक मानचित्रण में सक्षम है। यह भारत की निगरानी और रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक क्या है?
‘अन्वेषा’ में लगी हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक साधारण तस्वीरों से कहीं आगे जाकर काम करती है। यह तकनीक रोशनी के उन रंगों और तरंगदैर्घ्यों को भी पहचान लेती है जिन्हें मानव आंख नहीं देख सकती। जंगलों की गहराई से लेकर युद्धक्षेत्र में छिपी बेहद छोटी वस्तुओं तक की पहचान संभव बनाती है—यही वजह है कि इसे जासूसी कैमरे जैसी क्षमता वाला माना जाता है।
ISRO की ओर से स्टेज-3 से जुड़ी जांच रिपोर्ट के बाद मिशन की स्थिति पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी।



