
नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के खतरे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी पर कन्नड़ फिल्म एक्ट्रेस और पूर्व सांसद दिव्या संपदना उर्फ राम्या की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कोर्ट की टिप्पणी की तुलना पुरुषों से करते हुए राम्या ने सोशल मीडिया पर ऐसा बयान दिया, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि कुत्तों का मूड पहचानना संभव नहीं है। यह टिप्पणी उन याचिकाकर्ताओं के तर्क के जवाब में आई, जिन्होंने आवारा कुत्तों से जुड़े कोर्ट के आदेशों को चुनौती देते हुए कहा था कि जानवरों के साथ सहानुभूति रखने से हमलों को रोका जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल काटने की घटनाएं ही नहीं, बल्कि आवारा कुत्तों से होने वाले समग्र खतरे पर भी विचार जरूरी है।
राम्या की प्रतिक्रिया से बढ़ा विवाद
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राम्या ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “किसी आदमी का मन भी नहीं पढ़ा जा सकता—पता नहीं वह कब रेप या मर्डर कर दे। तो क्या सभी आदमियों को जेल में डाल दें?” उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया, तो कई ने इसे आपत्तिजनक करार दिया।
यह पहली बार नहीं है जब राम्या अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आई हों। इससे पहले भी वह सामाजिक और नागरिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी करती रही हैं। हाल ही में उन्होंने रेणुकास्वामी मर्डर केस में एक्टर दर्शन की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
क्या है पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर कुत्तों की जगह छीनी जाएगी तो वे हमला कर सकते हैं। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि समस्या केवल काटने की नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा की है। उन्होंने कहा, “आप कैसे पहचानेंगे कि सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है?”
तीन जजों की बेंच—जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया—आवारा कुत्तों और मवेशियों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, स्कूलों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। साथ ही स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें निर्धारित शेल्टर में भेजने का आदेश भी दिया था।
राम्या के ताजा बयान के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी बहस से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।



