शराब घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास समेत 31 अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 2,800 करोड़ से ज्यादा का घोटाला उजागर

रायपुर, 06 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास सहित 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की कुल 38.21 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
ED के रायपुर आंचलिक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक, इस घोटाले से राज्य के खजाने को 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, जिसकी गणना आगे की जांच में और बढ़ सकती है।
78 आलीशान संपत्तियां और 197 चल संपत्तियां जब्त
ईडी द्वारा कुर्क की गई कुल 38.21 करोड़ की संपत्तियों में —
अचल संपत्तियां – 21.64 करोड़ रुपये
कुल 78 संपत्तियां, जिनमें शामिल हैं:
- आलीशान बंगले
- प्रीमियम हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में फ्लैट
- व्यावसायिक दुकानें
- बड़े-बड़े कृषि भूखंड
चल संपत्तियां – 16.56 करोड़ रुपये
कुल 197 आइटम, जिनमें शामिल हैं:
- हाई वैल्यू फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
- कई बैंक खातों में नकद राशि
- जीवन बीमा पॉलिसियां
- शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश
IAS अफसरों ने चलाया ‘पैरलल एक्साइज सिस्टम’
ED की जांच में सामने आया है कि वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों का एक अपराध सिंडिकेट छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग पर पूरी तरह कब्जा कर चुका था।
इस सिंडिकेट का संचालन कर रहे थे —
- निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त)
- अरुण पति त्रिपाठी (तत्कालीन CEO, CSMCL)
दोनों ने मिलकर एक “पैरलल आबकारी सिस्टम” खड़ा किया, जिससे सरकारी नियमों को दरकिनार कर हजारों करोड़ की अवैध कमाई की गई।
‘पार्ट-बी शराब’ से हुआ हजारों करोड़ का खेल
इस घोटाले में सरकारी शराब दुकानों के जरिए एक अवैध ‘पार्ट-बी’ देसी शराब स्कीम चलाई गई। इसके तहत —
- अवैध शराब का निर्माण
- नकली होलोग्राम और अवैध बोतलों का इस्तेमाल
- बिना सरकारी रिकॉर्ड के सप्लाई
- शराब सीधे भट्टियों से दुकानों तक पहुंचाई गई
यह सब कुछ आबकारी अधिकारियों की सीधी मिलीभगत और साजिश से किया गया।
हर केस पर 140 रुपये की रिश्वत, दास को हर माह 50 लाख
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि —
- पार्ट-बी शराब की अनुमति देने के बदले
- आबकारी अफसरों को प्रति केस 140 रुपये का फिक्स कमीशन मिलता था
केवल निरंजन दास ने —
- 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई की
- इसके बदले उसे हर महीने 50 लाख रुपये रिश्वत दी जाती थी
कुल मिलाकर 31 अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय (POC) हासिल की।
ACB–EOW की FIR के बाद ED की एंट्री
इस घोटाले का खुलासा रायपुर स्थित एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद हुआ, जिसमें आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराएं लगाई गई थीं।
इसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की और अब भारी मात्रा में अवैध संपत्तियों को कुर्क किया गया है।
ED का साफ संदेश: भ्रष्ट सिस्टम पर सीधा प्रहार
ईडी ने कहा है कि यह कुर्की कार्रवाई उन अधिकारियों की गहरी साजिश और भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जिन्हें राज्य के राजस्व की रक्षा करनी थी, लेकिन वे ही खजाने को लूटने में शामिल थे।



